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भाग 8: शांत कुआँ काली पहाड़ी दूर से सिर्फ एक पहाड़ी लगती थी। पास आने पर समझ आता था कि वह पहाड़ी नहीं, एक चुप बैठा हुआ जानवर है। उसकी ढल� read more >>
भाग 9: सबसे नीचे की आवाज़ “टुनटुन… रिपोर्टर…” आवाज़ कुएँ की सबसे गहरी अँधेरी नस से उठी थी। धीमी। टूटी हुई। जैसे कोई पत्थरों के नीचे � read more >>
भाग 10: प्रसारण से पहले रात के उस अँधेरे में, काली पहाड़ी के नीचे, सबके चेहरों पर एक ही सवाल था— अब? पीछे पुराना आश्रम था, जिसके भीतर शां read more >>
भाग 11: नामों का प्रसारण पहला नाम हवा में गया, तो किसी ने ध्यान नहीं दिया। “Q-01… रीना… पिता रामू… गाँव बेलाही…” आश्रम के बाहर भंडारे की read more >>
भाग 12: गर्भगृह गर्भगृह में भगवान नहीं था। वहाँ स्क्रीनें थीं। दीवार से दीवार तक, ऊपर से नीचे तक, छोटे-बड़े मॉनिटर जल रहे थे। कुछ पर ला read more >>
भाग 13: दिल्ली वाली स्क्रीन सुबह होने से पहले ही भैरवनाथ आश्रम देश की खबर बन चुका था। पहाड़ी के ऊपर जहाँ रात को भजन, जयकारे और रोशनी थी, � read more >>
भाग 14: जिनके नाम लौटने बाकी हैं दिल्ली के निजामपुर शेल्टर से अठारह बच्चे निकाले गए थे। टीवी चैनलों ने पहले इसे “बड़ी सफलता” कहा। फिर read more >>
भाग 15: जिनकी आवाज़ बदली जानी थी पायल की आवाज़ फोन कटने के बाद भी कमरे में बनी रही। वह कोई बड़ी आवाज़ नहीं थी। सिर्फ एक बच्ची की फुसफुसा read more >>
भाग 16: आवाज़ बनाने वाला काउंटडाउन स्क्रीन पर चल रहा था। **दस।** **नौ।** **आठ।** काँच के उस पार पायल कुर्सी से बँधी थी। उसके सिर पर भारी हेडफ read more >>
भाग 17: माधवी टेस्ट लखनऊ के नवस्वर बाल कला संस्थान में रात उतर चुकी थी, लेकिन नींद वहाँ किसी कमरे में नहीं आई। हॉल की दीवारों पर अभी भी � read more >>
भाग 18: आवाज़ शून्य बिठूर मार्ग पर जाते हुए गंगा उनके साथ-साथ बह रही थी। सुबह अब पूरी तरह खुल चुकी थी, पर धुंध अभी भी नदी से चिपकी हुई थी। read more >>
भाग 19: घुँघरू का रास्ता गंगा के किनारे आग बुझ गई थी, लेकिन धुआँ अभी भी हवा में था। गोदाम की काली दीवारों से राख झर रही थी। फायर ब्रिगेड � read more >>
भाग 20: चौथा अंतरा माधवी की आवाज़ कट गई थी, लेकिन उसका आखिरी वाक्य हवा में अटका रहा— “नाम मत पूछना… गीत पूछना…” मौन सराय के आँगन में सब read more >>
नज़र को नज़र की नज़र न लगे। कोई अच्छा भी इस कदर न लगे। तुझे देखा है उस नज़र से मैंने-- जिस नज़र से तुझे नज़र न लगे।। (स्वरचित म� read more >>
माता होती हैं जन्मदाता, पिता होते हैं हमारे विधाता। इसलिए तो कहते हैं, भगवान है हमारे माता-पिता।। माता-पिता के चरणों के धूल, कहीं उन् read more >>
माता होती हैं जन्मदाता, पिता होते हैं हमारे विधाता। इसलिए तो कहते हैं, भगवान है हमारे माता-पिता।। माता-पिता के चरणों के धूल, कहीं उन् read more >>
बैसाखी पर चलने वाले मद में झूम रहे हैं। स्वारथ के ताने बाने बुन हर पग चूम रहे हैं। नेपथ्यों से लक्ष्य साधते कंधे बदल बदल कर-- संबंधों क� read more >>
खोटी किस्मत हुई दीन की, श्रम करता दिन रात। आता है उसके घर बस दुख,जैसे हो सौगात। उलटा कुदरत का लगता है,होता है कानून-- उसको सब सुविधा read more >>
जब नहीं आ रही थी बरसात, तब तो बहुत ही इंतजार था। जब आ गई अपने रूप में, होने लगी घमासान वारिश। पानी ही पानी छा गई चारों तरफ, लोग_बाग सब तर read more >>
जब प्यार किया तो डरना क्या, इसे कबूल सरेआम है करना। प्यार की चाहत जो भी हो, पूरा करना लाज़मी है। चाहे चांद_सितारे ही, क्यों न लाना पड़� read more >>
याद जब--जब आए उनकी, मन ये बड़ा बावला हो जाता है। धड़कन भी मस्त सुरों में धड़कती है, आंखों वह खूबसूरत तस्वीर आती है। कभी हम दोनों एक साथ, read more >>
जब मन में हो आरज़ू, तो आरज़ू का ऊर्जा साथ रहे। जिससे हर पथ हम चलते चलें, खुशियों को जीवन में लाते चलें। हर मुश्किल आसान लगने लगे, आगे � read more >>
हमें अभिमान है अपने वतन पर, हमें अभिमान है अपने वतनप्रस्ति पर। हमें अभिमान है अपने संस्कृति पर, हमें अभिमान है अपने गौरवशाली इतिहास � read more >>
आने वाला पल अच्छा ही आएगा, सपना सब पूर्ण कर जायेगा। जो भी शिकवा है, सब ही दूर कर जायेगा। दिलों पर छाई सारी गंदी साया, अपने आप ही दूर हो � read more >>
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