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यादों का समंदर
डूब जाता हूं यादों के समंदर में , अपने गुजरे जमाने में वापस लौट जाता हूं। बैठता हूं मैं जब तन्हाई में, खुद के ही ख्यालों में डूब जाता ह�
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बिल्ली
बिल्ली मौसी आती है दूध मलाई खाती है दबे पांव आ जाती है हमे देख गुर्राती है भागो भागो बिल्ली आई। हम बच्चों की सामत लाई।।
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"મથામણ"
લોકોના અભિપ્રાયોની આ જાળ ગૂંચવાયેલી છે, પોતાની મંજિલ શોધવી એક મથામણ છે. નોકરીની પાછળ ભાગે તો કહે 'નવું કંઈક કર', પોતાનો માર્ગ પસંદ ક�
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तहजीब
घर के हालातो ने कभी बिगड़ने नहीं दिया हमें, जो अगर हम कभी बिगड़े भी तो बड़े तहजीब से बिगड़े।।
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पथ में रखे पांव कैसे
पथ में रखे पांव कैसे, पग पग में चल रहा माया का संग्राम, मुखौटा पर मुखौटा लगाए चल रहे हैं यहां लोग, क्या होगा अब मानवता का पहचान
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"યાદોની મહેફિલ"
રાહ જોવાનું કહીને એ ક્યાંક ચાલ્યા ગયા, વર્ષો મારા એક પળના પૂરમાં ડૂબી ગયા. આંખમાં લઈને બેઠો છું યાદોની મહેફિલ, શ્વાસ પણ મારા વિરહની
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जागो रे भारत के लोगों
बढ़ती जाती महँगई, जन-जन रहे उदास। मेहनत की कमाई घटे, टूट रही है आस॥१ सुबह कमाए आदमी, शाम करे निर्वाह। फिर भी पूरे हो न सकें, जीवन के उत्स
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एक झुमकी की कीमत
रघुवीर सिंह पंवार "मां, मेरी फीस माफ कर दो... अब नहीं पढ़ना मुझे!" मोना की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। सामने उसकी मां – चुपचाप, भीगी आं
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जहाँ किताबें जलती हैं
गांव की चाय की दुकान आज कुछ ज्यादा ही भरी हुई थी। पास के सरकारी स्कूल में निरीक्षण होना था और गांव के प्रधान, सुरेश जी, खुद तामझाम के साथ
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तारे
आसमान में कितने तारे देखो कितने प्यारे प्यारे टिम टिम करते जगमगाते सबके मन को ये लुभाते रंग बिरंगे सपने सजाते रात होते ही नजर ये आ�
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सवाल
सोचनें दे , दुनिया के शायरों को तेरी खुबसूरती के उन्माद पर.......।। क्या, बोलतीं है कलम उनकी तेरी जवानी के सवाल पर....।।
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चाहत
योहीं, बन गए रिश्ते, हम ,जरा सा क्या मुश्कराऐ ।। ठहर से गए लम्हें हम तो कुछ नहीं कह पाऐ।।
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मैत्री
मैत्री म्हणजे नातं खास, सुख-दुःखात असतं सोबत नेहमीच खास. हसण्यात सहभागी, अश्रूंमध्ये आधार, मैत्रीचं नातं असतं जगातील सर्वात सुंदर उ�
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प्रेमावर
प्रेम म्हणजे सुंदर भावना, मनाला देणारी नवी चेतना. तुझ्या हसण्यात माझं जग दडलं, तुझ्या आठवणीत मन हरपलं. शब्द न बोलता जे समजतं, तेच खरं �
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खुदा की रहमत सारे संसार पर बरसे
खुदा की रहमत सारे संसार पर बरसे मेरे हिस्से की रहमत मेरी जान पर बरसे ए खुदा बना देना मुझे पानी अगर मेरी जान कभी प्यासे को तरसे
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"મંજિલ નો મલાજો"
મંજિલના ઈરાદા હતા જેટલા, પથ એથી ક્યાંક વિશેષ નીકળ્યો, ધીરજના પારે ઠરીને, તપનો અગ્નિ વિશેષ નીકળ્યો. મુશ્કેલીઓનું વહેતું ઝરણું છે આ મ
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"મૌનની સરવાણી"
શબ્દોની સરવાણી મનમાં, આજે થંભી ગઈ છે, કેમ આ કલમ મારી, આજે અટકી અટકી ગઈ છે! શોધવા નીકળ્યો હતો, નવા કોઈ અર્થો હું આજે, ને કાગળની કોરી કાયા
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साजिशें
साजिशें कर ,इस दुनिया में अ,मेरे दिल...........।। मुहोबत, और जंग सब जाईज है।।
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हे वीर......
हे वीर, भारत माँ के सम्मान के खातिर अपने प्राणों को भी न्योछावर कर पर देशद्रोही के आगे ना शीश झुकाना तू मरना गर पड़ा तुझे कभी तो खु�
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खिचड़ी की धूम
‘‘खिचड़ी की धूम’’ आओ खिचड़ी की धूम मचायें अपना कीमती समय बचायें। विद्यार्थियों की फेवरेट है, खिचड़ी स्वाद की ऐवरेस्ट है, खिचड़ी। इसे
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बिरह की ज्वाला
’’बिरह की ज्वाला’’ न जाने क्यों आज ये दिल मेरा रो गया दिल में मेरे वह प्यार के बीज बो गया। वह मोती मुझसे, जाने कहां खो गया मेरे जीवन
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स्वप्न परी
‘‘स्वप्न परी’’ सपना पूरा करने निकला, था, मै अपने घर से भूला भटका था, मै इस अन्जान सफर से हार गया मै जब चोट खायी चिड़िया के पर से। ना�
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कड़वा सच
कड़वा सच मीठी बातें जो मन लुभाये वो कभी मुझको न भाये, कांटे भी हो राहों में तो सच्चाई की राह न छोड़ो, दीवार खड़ी हो संकट की तो भी मुह ना म
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एक विधवा की व्यथा
‘‘एक विधवा की व्यथा’’ सामने इस महल में एक मधुबाला रहती है, जहां से मौन रुपी एक धारा बहती है, लफ्ज बंधे हुए है फिर भी कुछ कहती है,
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