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आत्म स्वरूप
आत्म स्वरूप होता है क्या आत्मा का स्वरूप बदलती है यह अनेक रूप! समझे समझाएं खुद का स्वरूप होता है देह का अनेक रूप! होती है देह में चे
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मन : शक्ति का स्त्रोत
शीर्षक :- मन कैसे समझे मर्म विश्व का टूटता है जब अभिमान देह का! कैसे मिले पंछी को आजादी होती है उसे जब प्रभु की प्राप्ति! चेतना तो है
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सबसे बड़ा कर्म
सबसे बड़ा कर्म है, दिल ना किसी का दुखाना, चाहे ना करना पूजा पाठ, ना चाहे ध्यान प्रभु का लगाना, भूखे को भोजन, प्यासे को पानी पिलाना, जो आ
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प्रभु की महिमा
प्रभु की महिमा करता हूं उस प्रभु को नमस्कार टिका हुआ है जिस पर संसार! अकल्पनीय है स्वरूप उसका खास क्यों माने उसे मानव के रूप में आज!
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गुरुओं का आदर सम्मान करना चाहिए
एक गाँव में गुरु जी श्री मद्भागवत कथा के लिए निकले। गाँव वालों से बातचीत की कथा के लिए। कुछ ने तो कहा ठीक है, कुछ की इच्छा नहीं हुई। गुरु
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मृत्यु का सच
मृत्यु होता है क्या मृत्यु का राज खोलती है प्रकृति इसे आज ! परिभाषा है चेतना की खास जुड़ी है प्रभु प्राप्ति की आस! होता है जब शरी�
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मृत्युका का सच
मृत्यु होता है क्या मृत्यु का राज खोलती है प्रकृति इसे आज ! परिभाषा है चेतना की खास जुड़ी है प्रभु प्राप्ति की आस! होता है जब शरी�
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विश्व की विशालता
विशालता अंतहीन अंतरिक्ष में आज करें जीवन में कुछ विशाल! करें प्रज्वलित ज्ञान की मशाल दिखाती है जो मोक्ष का मार्ग! होते हैं प्रगट �
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प्रभु मिलन
प्रभु-मिलन करते हैं दर्शन कण-कण में मिलते हैं प्रभु क्षण - क्षण में! करते हैं जीवन में उनका ध्यान करते हैं पूरा जो अधूरा ज्ञान! होती
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निरलेप
"सत्यसार नहीं प्रतिबंधित, भीतर जाकर खोज करो।" "कहां किसकी माने बैठे हो, खुद सोचो ज़रा होश करो।" "जग का मालिक बैठ देह में हो गया बंद अलेप" "�
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ईश्वर
तब तक ये चलता रहे, जब तक इसमें मैं जो मै इस से जुदा हुई, ये कुछ भी ना है
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सर्कल
जिन्दगी एक सर्कल की तरह चलती रहती है। जो उससे थोड़ा भी बाहर हुआ। वह जिंदगी से ही बाहर हो जाता है। फिर वह अन्य दूसरे सर्कल या चक्र में पर�
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