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देश-प्रेम
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देश-प्रेम
बलिदान वीरों ने दिया
मुखड़ा बलिदान वीरों ने दिया बलिदान वीरों ने दिया ऐसे वीरों को नमन है किया ऐसे वीरों को नमन है किया है किया है किया ऐसे वीरों को नमन
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बिन लड़े बिन मरे हार कैसे मान जाए
बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लोगे? योद्धा हो तुम, वीर हो तुम, पीछे कैसे हट जाओगे? बिन लड़े, बिन मरे, युद्ध से भाग कैसे जाओगे? अभिमन्य�
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देश प्रेम
वतन के लिए मर जाएंगे झुकने न देंगे तिरंगे कि सान चुकाएंगे इस मिट्टी का कर्ज़ चाहे देनी पड़े हमको अपनी जान
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इस मिट्टी का कर्ज़ देश पर
बरसात की हल्की-हल्की फुहारों से भीगी धरती की सौंधी खुशबू जब हवा में घुलती है, तब ऐसा लगता है मानो हमारी मातृभूमि अपने बच्चों को प्यार स�
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भरत तिवारी
भरत तिवारी मरकर भी ज़िन्दा रहेगा भारत का अभिमान रहेगा l आजाद भारत के इस क्रान्तिकारी पर भारतीय को गुमान रहेगा l वो पागल नहीं था �
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"ગુજરાતી ગૌરવગાન"
અસ્મિતાની સુગંધ લઈને જ્યારે સાહિત્ય મારું ગહેકશે, માતૃભાષાના દરેક અક્ષર પર આખું વિશ્વ આદરથી નમશે. શબ્દોમાં છે નર્મદાના નીરની પવિ�
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एक और भगत सिंह बनकर आया था...
एक और भगत सिंह बनकर आया था, अन्यायों से जो टकराया था। सच की मशाल लिए हाथों में, अंधेरों से न घबराया था॥ झुकना जिसकी फ़ितरत न थी, सत्य ह�
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अपना गांव
अपना गांव कितना सुन्दर अपना गांव यहां मिले वृक्षों की छांव। प्रकृति की है, छटा निराली चारों तरफ है हरियाली नहीं कोई कोलाहल भारी �
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साम्प्रदायिकता
‘‘साम्प्रदायिकता’’ भारत भूमि में हम जन्में यारों, यह देश हमारा अपना है, उद्धार करो इस मात्र भूमि का यही हमारा सपना है । इस दुनिय�
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सोचो ज़रा ये क्यों बनाया, बंदूकों को अपना गहना
न समझो तुम कैसा देश है, बिहार की गाथा अजीब है। अपराधी का वह मज़हब है, सत्ता में बैठे राम का भक्त। भ्रष्ट पर जो आवाज़ उठाया, मृत शरीर को जग�
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शान तिरंगे की
‘‘शान तिरंगे की’’ भारत मां तेरे आंचल में मैने जन्म लिया है, जन्म भूमि तूही, कर्म भूमि तूही। तुझको ही अपना सर्वस्व दिया है, मातृ भूम�
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हे वीर......
हे वीर, भारत माँ के सम्मान के खातिर अपने प्राणों को भी न्योछावर कर पर देशद्रोही के आगे ना शीश झुकाना तू मरना गर पड़ा तुझे कभी तो खु�
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