Monu kumar 27 Jun 2026 ग़ज़ल देश-प्रेम SANGHARSH POEM NEET JEE MONU POEM MONU KI SANGHARS KI KAHANI 4455 0 Hindi :: हिंदी
बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लोगे? योद्धा हो तुम, वीर हो तुम, पीछे कैसे हट जाओगे? बिन लड़े, बिन मरे, युद्ध से भाग कैसे जाओगे? अभिमन्यु की भाँति, अकेले खड़े हो रण में। साँस रहे जब तक तन में, हार कैसे मान लोगे? चाणक्य की नीति लेकर, उतरे हो इस मैदान में। बुद्धि भी है, साहस भी है, हार कैसे मान लोगे? महाराणा से सीखा है, झुकना कभी नहीं। भगत सिंह से सीखा है, रुकना कभी नहीं। शिवाजी से सीखा है, हर मुश्किल से लड़ना। अशोक से सीखा है, संकल्प से जीतना। जीत मिले या मृत्यु मिले, दोनों का सम्मान करो। लेकिन... बिन लड़े, बिन मरे, हार कभी मत मानो। सूरज बनकर जलना है, नदी बनकर बहना है। जब तक मंज़िल मिल न जाए, तब तक बस लड़ना है। बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लोगे? योद्धा हो तुम, वीर हो तुम, इतिहास नया लिख जाओगे।