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याद आवेला आ हो...... घर वा दूअरबा....गउआ बगीचा.......खेत खलियानवा.....
हो .....याद आवेला आ, हो... याद आवेला आ, हो..….. याद आवेला आ हो...... घर वा दूअरबा....गउआ बगीचा.......खेत खलियानवा..... याद आवेला हो......याद आवेला आ याद आवेला ह
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जवान का अरमान
हर जवान का यही है अरमान, कर दे अपनी जान वो देश पर कुर्बान, भारत मां की कभी कम ना हो पाए शान, चाहे क्यों ना देनी पड़े हमें अपनी जान।।
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জননী
যাচিম শিৰ আইৰ বাবে ৰাখিম জননীৰ মান, হৃদয়ৰ ভাষাৰে মুকুতিৰ গানেৰে আইলৈ যাঁচিছো প্ৰণাম।
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मत करो हिंदू मुसलमान
मत करो तुम हिंदू मुसलमान, दोनों के रगों में है लहू एक समान । दोनों ही हो भारत मां की संतान, मत करो तुम हिंदू मुसलमान। साथ पले तुम साथ बढ
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आज जिंदगी को पीछे मुड़कर देखा
आज जिंदगी को पीछे मुड़कर देखा हमने, क्या खोया और क्या पाया है हमने? कि बेशक ऐ दोस्त तुझसे कम कमाया है हमने, पर अपनी तरक्की के लिए, किसी �
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क्या आजाद हैं हम?
आजाद हैं हम, आजाद हैं हम। क्या सचमुच में आजाद हैं हम? धर्म के नाम पर देश बंटा है, जातिवाद का दर्द बड़ा है। बेरोजगारी का रोग लगा है, नफर�
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मिट्टी का संदेश
मैं उस मिट्टी की बात करूँ, जो हर जन्म की पहली धड़कन है, जो आँसुओं से भीगकर हँसती है, और लहू से रंगकर भी महकती है। वो मिट्टी — जिसने राम क
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वतन
हम भी खड़े थे जवानी की दहलीज में, हाथों में अपना दिल लिए हुए, सब ने सनम को अपना दिल दिया, हमने सनम को नहीं वतन को चुन लिया।।
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वर्दी नहीं पहनती लेकिन
वर्दी नहीं पहनती लेकिन, सैनिक धर्म निभाती हूं। पत्नी हूं फौजी की मैं, सैनिक धर्म निभाती हूं। वह जब भी सरहद पर जाते , उनकी खैर मनाती ह�
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मातृभाषा का महोत्सव
हिंदी है दिल की जुबां, हिंदी है जन-गान। भारत माँ की वाणी है, इसका ऊँचा मान।। माटी की खुशबू लिए, बोले हर इंसान। गंगा-जमुनी संस्कृति की, ह�
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भारत – दिल की धरती
माटी बोले, सूरज हँसे, पवन सुने हर राग। इस धरती के आँचल में, छिपा है अनुपम भाग। हर बूँद यहाँ पर अमृत है, हर आँसू में एक गीत। जो झुका तिरं�
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अगर मैं जवान ना होता
कभी-कभी सोचता हूं एकांत में, मैं अगर जवान ना होता तो क्या होता? मैं भी बाबू बन बैठा होता किसी दफ्तर में, यू वीरान सुनसान जगहो में परेशा�
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