बार-बार चुनाव का शोर, कभी यहाँ, कभी वहाँ मतदाता की कतार,
कभी लोकसभा, कभी विधान सभा, कभी पंचायत, कभी नगर-पार,
हर बार घोषणा पत्र, हर बार नारा, � read more >>
दीप बनो जो राह दिखाए,
जो अंधियारा दूर भगाए।
जलो मगर सेवा के लिए,
ना कि केवल मेवा लिए।
दीप बनो जो सत्य जलाए,
झूठ और भय सब मिट जाए।
जग में � read more >>
वो न झुकता है, न रुकता है, न डर की भाषा जानता है,
सीना ताने, मौत से आंख मिलाकर चलता जाता है।
जिसे धूप, बर्फ़, तूफ़ान नहीं कोई भी रोक सके,
वो � read more >>