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कड़वा सच

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 19 Jun 2026 कविताएँ समाजिक #कड़वा सच #महेश्वरउनियाल 3915 0 Hindi :: हिंदी

कड़वा सच

मीठी बातें जो मन लुभाये
वो कभी मुझको न भाये,

कांटे भी हो राहों में
तो सच्चाई की राह न छोड़ो,

दीवार खड़ी हो संकट की 
तो भी मुह ना मोड़ो,

सच्चाई की डगर चलो 
जो बहुत ही अच्छी है,

झूठ की दीवार को तोड़ो 
जो बहुत ही कच्ची है,

सच कहने से न कतराओ
जो कहना है, कह डालो,

लील जायेगा झूठ 
इसके नासूर को मत पालो,

सच को झूठ में बदलना 
बांये हाथ का खेल है,

सच को सच कहना 
कढ़ाई का खोलता तेल है,

पी लिया जिसने यह तेल
देव तुल्य कहलायेगा,

वरना झूठ की गठरी लेकर 
पापी, नर्क में डूब जायेगा।


लेखक-
महेश्वर उनियाल
7579155644

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