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स्वप्न परी

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 19 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत #स्वप्न परी #महेश्वरउनियाल #जिन्दगी 3087 0 Hindi :: हिंदी

‘‘स्वप्न परी’’ 

सपना पूरा करने निकला,
था, मै अपने घर से
 
भूला भटका था, मै 
इस अन्जान सफर से

हार गया मै जब
चोट खायी चिड़िया के पर से।
 
नाम तेरा लेता था मै,
हर गीत और गाने में

देर हो गई मुझको 
तेरे संग आने में

अब न कसर छोड़ूगां 
मै तुझको पाने में

पूरा जीनव बिता दिया 
मैने खुदको ही समझाने में।
 
उलझी सी किरण थी तू
मेरी जिन्दगी के सवालों की

उड़ती हुई पक्षी थी तू
झुकी हुई उन डालों की
 
क्या खुशबू थी तेरे 
उन गलाबी गालों की

एक चाबी थी तू 
वीरान पड़े उन तालों की।

जन्नत की मिट्टी से बनी थी तू
या सोने के तारों से 

वर्फ के गोले से बनी थी तू 
या जलते हुए अंगारों से

सुन्दर परी सजी हुई 
तू फूलों के हारों से

बदला लेने आयी जमीं पर 
अपने गुनहगारों से।



लेखक-
महेश्वर उनियाल
 						 7579155644

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