संदीप कुमार सिंह 07 Jul 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह छंद मुक्तक कविता गरीबी के ऊपर है जो बिल्कुल सच्चाई को उजागर करती है. 557 0 Hindi :: हिंदी
खोटी किस्मत हुई दीन की, श्रम करता दिन रात। आता है उसके घर बस दुख,जैसे हो सौगात। उलटा कुदरत का लगता है,होता है कानून-- उसको सब सुविधा मिलती है,करे सिर्फ जो बात।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....