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आवाज़ नंबर 19 (भाग:16) This post in Under Review

Vinod 06 Jul 2026 कहानियाँ अन्य #AwaazNumber19 #HindiAudioStory #HindiHorrorStory #SuspenseThriller #MysteryStory #HindiKahani #HorrorKahani #ThrillerStory #AudioSeries #CrimeMystery #PsychologicalThriller #DarawaniKahani 450 0 Hindi :: हिंदी

भाग 16: आवाज़ बनाने वाला

काउंटडाउन स्क्रीन पर चल रहा था।

**दस।**
**नौ।**
**आठ।**

काँच के उस पार पायल कुर्सी से बँधी थी। उसके सिर पर भारी हेडफोन थे। दोनों कान पूरी तरह ढँके हुए। आँखें डर से फैली हुईं। उसके छोटे हाथों पर पट्टियाँ थीं, लेकिन वह फिर भी उँगलियाँ मोड़कर खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।

कंप्यूटर स्क्रीन पर नीली रोशनी चमक रही थी—

**Voice Reassignment Session**
**Subject: Preeti / Pending**
**Original voice sample detected**
**Overwrite training: 10 seconds**

कमरे के अंदर खड़ा युवा आदमी मुस्कुरा रहा था।

उसने अभी-अभी नयना की आवाज़ में कहा था—
“पायल, डरो मत। मैं तुम्हें लेने आई हूँ।”

लेकिन वह नयना नहीं थी।

वह उसकी आवाज़ थी।

नयना का गला सूख गया।

अपनी ही आवाज़ को अपने खिलाफ सुनना ऐसा था जैसे आईने में चेहरा अपना दिखे, पर आँखें किसी और की हों।

“उसे छोड़ दो!” नयना ने काँच पर मुट्ठी मारी।

काँच मोटा था। आवाज़ सिर्फ धप्प बनकर लौट आई।

आदमी ने इंटरकॉम चालू किया। अब वह अपनी असली आवाज़ में बोला—शांत, साफ़, लगभग शिष्ट।

“गुस्सा मत करो। गुस्से में आवाज़ टूटती है। और टूटी आवाज़ से मॉडल खराब होता है।”

कबीर दरवाज़े के पैनल पर झुक गया। “लॉक इलेक्ट्रॉनिक है। अंदर से ओवरराइड।”

मीरा नाथ ने काँच के पार पायल को देखा। उसका चेहरा सख्त हो गया। “यह ‘आवाज़ बदलना’ नहीं है।”

नयना ने पूछा, “क्या?”

मीरा नाथ की आँखें स्क्रीन पर थीं। “यह बच्चे को उसकी आवाज़ से अलग करने का तरीका है। पहले उसे उसकी अपनी आवाज़ सुनाई जाती है। फिर उसी जैसी नकली आवाज़। फिर नया नाम। फिर नया वाक्य। बार-बार। बच्चा भ्रमित हो जाता है—कौन-सी आवाज़ मेरी है?”

अंदर स्क्रीन पर काउंटडाउन चल रहा था।

**सात।**

कंप्यूटर से पायल की अपनी रिकॉर्डेड आवाज़ आई—

“मेरा नाम पायल है…”

फिर तुरंत वही आवाज़ थोड़ी साफ़, थोड़ी बदली हुई—

“मेरा नाम प्रीति है…”

पायल ने सिर झटकना शुरू किया। वह रो रही थी, लेकिन हेडफोन से आवाज़ें उसके कानों में घुसती जा रही थीं।

**छह।**

कबीर ने दरवाज़े की वायरिंग खोलने की कोशिश की। “अगर मैंने गलत तार काटा तो लॉक स्थायी बंद हो सकता है।”

नयना ने कहा, “सही तार काट।”

“वाह। तकनीकी सलाह बहुत गहरी है।”

मीरा नाथ ने काँच पर हाथ रखा। “पायल! मेरी आवाज़ सुनो!”

लेकिन पायल तक बाहर की आवाज़ नहीं पहुँच रही थी।

आदमी ने मुस्कुराकर कहा, “ध्वनि-रोधी काँच। आर्या को याद होगा।”

मीरा नाथ का चेहरा बदल गया। उसने दाँत भींचे। “मेरा नाम आर्या नहीं है।”

“मुझे पता है,” वह बोला। “इसीलिए तो तुम उपयोगी थीं।”

**पाँच।**

नयना ने इंटरकॉम के पास जाकर कहा, “तुम कौन हो?”

आदमी ने हल्का झुककर जैसे परिचय दिया। “ईशान रावल। नवस्वर का शोध-निदेशक। भैरव जी मुझे ‘स्वरकार’ कहते थे। वे नाम बदलते थे। मैं आवाज़ों को रहने लायक नया घर देता हूँ।”

कबीर ने तिरस्कार से कहा, “अपराधी लोग अपने पदनाम बहुत सुंदर रखते हैं।”

ईशान ने कबीर को देखा। “तुम कबीर हो। ऑडियो एडिटर। तुम्हारे काम में शोर बहुत है, पर संवेदना है। अफसोस, तुमने औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया।”

कबीर ने लॉक से नज़र हटाए बिना कहा, “हाँ, मेरे पास अपराध-प्रायोजित डिग्री नहीं है।”

ईशान हँसा नहीं। शायद वह हँसी को अप्रभावी ध्वनि मानता था।

**चार।**

नयना ने स्क्रीन पर फाइल का नाम देखा—

**VOICE_19_SOURCE_MASTER**

उसके भीतर बिजली दौड़ी।

“VOICE 19 तुम्हारे पास कैसे?” उसने पूछा।

ईशान ने कहा, “मेरे पास नहीं। मेरे पास उसकी जड़ है। असली रिकॉर्डिंग्स, टूटे हुए सैंपल, अरविंद अवस्थी का गला, तुम्हारी बचपन की आवाज़, मीरा नाथ के सुर, पायल जैसे बच्चों की बेसलाइन। आवाज़ें मरती नहीं। कोई उन्हें सही तरीके से कैद करे तो वे किसी भी मुँह से फिर जन्म ले सकती हैं।”

नयना को याद आया—पहली रात नोएडा में फोन पर आई नकली आवाज़। “मेरी बच्ची…”
वह पापा जैसी थी, पर नहीं थी।
उसने गलत निकनेम बोला था।

“मेरे पास जो नकली अरविंद की आवाज़ आई थी…” नयना बोली।

ईशान ने सिर हिलाया। “एक जल्दबाज़ी में बना मॉडल। खराब काम। मैंने नहीं भेजा था। भैरव के लोगों ने पुराना संस्करण इस्तेमाल किया। असली मॉडल अधिक सटीक है।”

**तीन।**

कबीर ने अचानक कहा, “रुक। यह काउंटडाउन सिर्फ सेशन शुरू करने का है, फाइनल ओवरराइट नहीं। इसे रोकने के लिए ऑडियो इनपुट चाहिए। अगर अंदर का माइक बाहरी पैच ले ले तो…”

“तो?” नयना ने पूछा।

“तो हम पायल को उसकी असली आवाज़ सुना सकते हैं। भ्रम टूट सकता है।”

मीरा नाथ ने कहा, “उसे गीत सुनाओ।”

कबीर ने तेजी से अपना बैग खोला। “नयना, पायल का कॉल सैंपल फोन में है?”

“हाँ।”

“गीत वाला हिस्सा निकाल।”

**दो।**

नयना के हाथ काँप रहे थे। उसने फोन खोला। कॉल रिकॉर्डिंग। वेवफॉर्म। उसे गीत वाला हिस्सा याद था।
“आम के पेड़ तले…”

कबीर ने अपना छोटा ऑडियो इंटरफेस निकाला, उसे दरवाज़े के सर्विस पैनल से जोड़ने की कोशिश की। “यह पैनल शायद इंटरकॉम लाइन से जुड़ा है। अगर मैंने इसे उल्टा लगाया तो हमें करंट लग सकता है।”

मीरा नाथ ने कहा, “लगने दो।”

कबीर ने उसे देखा। “तुम बहुत प्रेरणादायक हो।”

**एक।**

ईशान ने स्क्रीन पर हाथ रखा। “अब देखो। आवाज़ कैसे टूटती है।”

कंप्यूटर से तीखी बीप आई।

**Overwrite training: Begin**

पायल चीख उठी।

हेडफोन में एक साथ तीन आवाज़ें चलीं—

“मेरा नाम पायल है।”
“मेरा नाम प्रीति है।”
“मुझे घर नहीं जाना।”

फिर वही वाक्य पायल जैसी आवाज़ में, फिर किसी और साफ़ आवाज़ में, फिर नयना की आवाज़ में—

“पायल, सुनो। तुम्हारा नाम प्रीति है।”

नयना का खून जम गया।

“नहीं!” उसने चिल्लाया।

कबीर ने तार जोड़ दिया। चिंगारी निकली। वह पीछे झटका खाकर गिरा।

“कबीर!” नयना चीखी।

“जिंदा हूँ!” वह कराहते हुए बोला। “लेकिन मेरा हाथ मुझे गाली दे रहा है। प्ले करो!”

नयना ने फोन में गीत वाला हिस्सा चलाया।

पहले कुछ नहीं हुआ।

फिर इंटरकॉम में खरखराहट आई।

अंदर ईशान ने सिर उठाया। “यह क्या—”

स्पीकर में हल्की आवाज़ गई। बहुत हल्की।

“आम के पेड़ तले…”

पायल की चीख एक पल को रुकी।

ईशान ने तुरंत सिस्टम की तरफ हाथ बढ़ाया। “लाइन काटो।”

कबीर ने दाँत भींचकर पैनल पकड़ा। “मीरा, वायर पकड़ो। यह ढीला हुआ तो सिग्नल गया।”

मीरा नाथ ने बिना झिझक तार पकड़ा। उँगलियों में चिंगारी लगी, पर उसने छोड़ा नहीं।

नयना ने आवाज़ बढ़ाई। फिर खुद गाने लगी—

“आम के पेड़ तले… नदिया बोले रे…”

इस बार उसकी आवाज़ पायल के हेडफोन तक पहुँची।

पायल की आँखें काँच के पार नयना को खोजने लगीं।

ईशान ने कंप्यूटर पर कमांड दबाया। नकली आवाज़ें और तेज़ हुईं।

“मेरा नाम प्रीति है।”
“मेरा नाम प्रीति है।”
“मेरा नाम प्रीति है।”

नयना और जोर से गाई।

मीरा नाथ ने साथ दिया। उसका सुर साफ़ था, स्थिर था, वर्षों की कैद से निकला हुआ, मगर अब किसी बाबा का भजन नहीं—एक बच्ची को वापस बुलाती आवाज़।

“आम के पेड़ तले… नदिया बोले रे…”

कबीर भी बेसुरा सा साथ देने लगा। “आम के पेड़ तले…”

मीरा नाथ ने झुँझलाकर कहा, “सुर में!”

कबीर ने कहा, “बच्ची बच रही है, ऑडिशन नहीं दे रहा!”

पायल का चेहरा बदलने लगा। उसकी साँस तेज़ थी, पर वह अब सुन रही थी। नकली आवाज़ों के बीच असली गीत एक धागे की तरह उसके भीतर पहुँच रहा था।

नयना ने माइक के पास मुँह ले जाकर कहा—

“पायल! तुमने मुझे फोन किया था। तुमने कहा था—तुम्हारा नाम शायद पायल है। शायद नहीं। तुम बोलो। तुम्हारा नाम क्या है?”

हेडफोन में नकली आवाज़ फिर आई—

“मेरा नाम प्रीति है।”

पायल ने होंठ भींचे।

ईशान ने कहा, “अच्छी बच्ची। बोलो।”

पायल काँपी। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। फिर उसने बहुत धीमे कहा—

“मेरा…”

नकली आवाज़—

“प्रीति।”

पायल ने सिर झटका।

“नहीं…”

ईशान का चेहरा पहली बार कस गया।

पायल ने पूरी ताकत से कहा—

“मेरा नाम पायल है!”

सिस्टम पर लाल चेतावनी चमकी—

**Subject resistance detected**
**Overwrite unstable**

कबीर चिल्लाया, “हाँ!”

ईशान ने गुस्से में सिस्टम बंद करने की कोशिश की। “कच्ची आवाज़ें हमेशा भावुकता में लौटती हैं। इसलिए इन्हें दोहराव चाहिए।”

नयना ने काँच पर हाथ रखा। “पायल, गाओ!”

पायल ने रोते हुए गीत पकड़ा—

“आम के पेड़ तले… नदिया बोले रे…”

उसका सुर टूटा हुआ था। पर वही उसका सुर था।

सिस्टम पर दूसरी चेतावनी आई—

**Original voice anchor restored**
**Session failed**

ईशान की आँखों में पहली बार गुस्सा आया। उसने कुर्सी की तरफ झपटकर पायल के हेडफोन खींचे और उसे उठाने लगा।

उसी क्षण दरवाज़े पर जोरदार धमाका हुआ।

फरहान अली और पुलिस की टीम अंदर पहुँच चुकी थी।

“दरवाज़ा खोलो!” फरहान चिल्लाए।

कबीर ने लॉक पैनल पर आखिरी तार खींचा। “अब या कभी नहीं।”

दरवाज़े से क्लिक की आवाज़ आई।

काँच वाले कमरे का बाहरी लॉक खुला।

नयना अंदर दौड़ी।

ईशान ने पायल को ढाल की तरह पकड़ा। “पीछे रहो!”

उसके हाथ में छोटा इंजेक्टर था—शायद सेडेटिव। पायल की गर्दन के पास।

नयना वहीं रुक गई।

“उसे छोड़ो,” उसने कहा।

ईशान शांत होने की कोशिश कर रहा था, मगर उसके माथे पर पसीना था। “तुम लोग समझते नहीं। तुम एक पायल बचाओगे, नेटवर्क सौ पायल बना लेगा। आवाज़ को भावनात्मक मत समझो। आवाज़ डेटा है।”

मीरा नाथ अंदर आई। “और बच्चा?”

ईशान ने कहा, “कच्चा स्रोत।”

मीरा नाथ की आँखों में वह आग आई जो मंच पर भैरव के सामने आई थी। “मैं भी तुम्हारे लिए स्रोत थी?”

ईशान ने उसे ध्यान से देखा। “तुम अद्भुत थी। आर्या के भजन पर दान तीन गुना बढ़ा था। तुम्हारी आवाज़ में प्राकृतिक दर्द था।”

मीरा नाथ ने धीरे से कहा, “तूने दर्द को मापना सीख लिया। महसूस करना नहीं।”

ईशान ने पायल को और कस लिया। “रास्ता दो।”

फरहान ने पिस्तौल तानी। “बच्ची को छोड़ो।”

ईशान ने हँसकर कहा, “गोली चलाओगे? बच्ची मेरे सामने है।”

नयना ने देखा—पायल काँप रही थी। उसकी आँखें नयना पर थीं। भरोसा भी, डर भी।

नयना ने धीरे से कहा, “पायल, आँख बंद करो।”

ईशान ने तीखी नज़र से पूछा, “क्यों?”

नयना ने जवाब नहीं दिया।

पायल ने आँख बंद कर ली।

नयना ने आरव की लाल कार जेब से निकाली और जमीन पर ईशान की तरफ फेंकी।

ईशान का ध्यान एक पल को नीचे गया।

उसी पल पायल ने पूरी ताकत से उसके हाथ पर दाँत काट लिया।

ईशान चीखा। इंजेक्टर गिरा। नयना ने झपटकर पायल को खींच लिया। मीरा नाथ ने ईशान की कलाई पकड़ी। फरहान अंदर दौड़े। कबीर ने पीछे से तारों का गुच्छा उसके पैरों में फेंका। ईशान लड़खड़ाया और फर्श पर गिर गया।

पुलिस ने उसे दबोच लिया।

पायल नयना से चिपक गई।

“दीदी…” वह रो रही थी। “मैंने अपना नाम बोला।”

नयना ने उसे बाँहों में भर लिया। “हाँ। बहुत जोर से।”

पायल ने काँपते हुए कहा, “अब वो बदलेंगे नहीं?”

नयना ने उसके बाल सहलाए। “नहीं। अब तुम्हारी आवाज़ तुम्हारी है।”

कबीर ने धीरे से कहा, “और इसका बैकअप भी बन गया है।”

नयना ने उसे देखा।

“मतलब?”

“मतलब,” कबीर ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया, “पूरा सेशन रिकॉर्ड हो गया। ईशान का चेहरा, सिस्टम, वॉइस ओवरराइट, सब। और इस बार हमने लाइव नहीं, सुरक्षित कॉपी पहले बनाई है।”

फरहान ने ईशान को उठवाया। “ईशान रावल, आपको बच्चों की अवैध कैद, पहचान छेड़छाड़, डिजिटल फर्जीवाड़े, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य धाराओं में हिरासत में लिया जाता है।”

ईशान ने पायल से नज़र नहीं हटाई। फिर नयना की तरफ देखा।

“तुम खुश हो?” उसने पूछा। “तुमने एक सेशन रोक दिया। पर VOICE_19_SOURCE_MASTER मेरे पास अकेली कॉपी नहीं है।”

कबीर ने कहा, “यह लाइन हर खलनायक बोलता है।”

ईशान ने उसकी तरफ देखा। “तुम्हारी समस्या यही है। तुम मुझे खलनायक समझते हो। मैं इंजीनियर हूँ। जिन लोगों ने बच्चों को बेचा, उन्होंने मुझे डेटा दिया। मैंने सिर्फ आवाज़ को संरचना दी।”

नयना ने कहा, “संरचना भी अपराध हो सकती है।”

ईशान मुस्कुराया। “और सच भी हथियार हो सकता है। तुमने आवाज़ 19 से भैरव को गिराया। वह आवाज़ किसने साफ़ की? किसने पुराने टूटे टेप से अरविंद को सुनने लायक बनाया? किसने तुम्हें पहला पेन ड्राइव पहुँचाया?”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

नयना का दिल धड़का।

“तुमने भेजा था?” उसने पूछा।

ईशान ने सीधे उत्तर नहीं दिया। “तुम्हें मझगवाँ किसने बुलाया, नयना? भैरव नहीं चाहता था कि तुम सच तक पहुँचो। देवव्रत डरता था। अरविंद कैद में था। मीरा नाथ छिपी थी। फिर आवाज़ 19 तुम्हारे दरवाज़े तक कैसे आई?”

कबीर ने दाँत भींचे। “तू यह कह रहा है कि तू मदद कर रहा था?”

ईशान ने कहा, “मैं प्रयोग कर रहा था।”

मीरा नाथ ने घृणा से कहा, “बच्चों पर?”

“सिस्टम पर,” वह बोला। “मैं जानना चाहता था—अगर आवाज़ सही कान तक पहुँचे तो क्या सचमुच व्यवस्था हिलती है? परिणाम रोचक रहा।”

नयना ने पायल को और कस लिया। “तुमने मेरी जिंदगी को प्रयोग बनाया।”

ईशान शांत रहा। “तुम पहले से प्रयोग थीं। मैंने सिर्फ उसे सक्रिय किया।”

फरहान ने उसे धक्का दिया। “ले चलो।”

ईशान जाते-जाते मुड़ा। “VOICE_19_SOURCE_MASTER में सिर्फ अरविंद नहीं है। उसमें तुम्हारी बचपन की आवाज़ भी है। पायल की भी होगी। आर्या की भी। और उस ‘सुर’ की भी, जिसने पायल को फोन दिया।”

मीरा नाथ आगे बढ़ी। “सुर कौन है?”

ईशान की मुस्कान बदल गई। इस बार उसमें कुछ निजी था।

“वही,” उसने कहा, “जिसकी आवाज़ कोई नहीं बना पाया।”

फरहान ने उसे बाहर ले जाया।

कमरे में मशीनें अभी भी चल रही थीं। स्क्रीन पर सेशन फेल लिखा था। पायल नयना से चिपकी थी। बाहर हॉल में पुलिस बच्चों को सुरक्षित निकाल रही थी। कुछ बच्चे अब भी “मुझे घर जाना है” कह रहे थे। कुछ ने पहली बार यह वाक्य जोर से कहा था, जैसे अनुमति मिल गई हो।

कबीर सिस्टम के पास बैठ गया। “मुझे यह डेटा चाहिए। पूरा।”

फरहान ने कहा, “फोरेंसिक टीम—”

कबीर ने काटा, “हाँ, आधिकारिक कॉपी बनेगी। लेकिन अगर उनके लोग सिस्टम वाइप कर दें तो? अभी राइट-ब्लॉकर लगाइए, नेटवर्क काटिए, और पावर बैकअप सुरक्षित कीजिए। यह सिर्फ कंप्यूटर नहीं, अपराध का गला है।”

फरहान ने उसे देखा, फिर अपनी टीम को आदेश दिया। “सिस्टम सील करो। कोई नेटवर्क नहीं। पूरा इमेज बनाओ।”

कबीर ने स्क्रीन पर फाइलें देखीं।
**VOICE_19_SOURCE_MASTER**
**A-27 Voice Sample**
**ARYA_Devotional Model**
**NAYNA_Child Fragment**
**ARVIND_Damaged Throat Reconstruction**
**SUR_Unknown_Clean**

उसकी उँगली आखिरी फाइल पर रुकी।

“सुर,” उसने कहा।

नयना ने पायल से पूछा, “जिस दीदी ने फोन दिया था, सुर… वह कहाँ है?”

पायल ने चेहरा उठाया। आँखें आँसुओं से भरी थीं। “नीचे।”

सब एक साथ चुप हो गए।

मीरा नाथ ने धीमे कहा, “हर जगह एक नीचे होता है।”

फरहान ने तुरंत पूछा, “नीचे कहाँ?”

पायल ने काँपते हुए रिकॉर्डिंग कक्ष के पीछे दीवार की तरफ इशारा किया। “जहाँ जिनकी आवाज़ नहीं टूटती, उन्हें रखते हैं।”

नयना का दिल बैठ गया।

कबीर ने दीवार देखी। वहाँ ध्वनि-रोधी पैनल था। उसने हाथ से ठोका। आवाज़ खोखली आई।

“यह नकली दीवार है,” उसने कहा।

फरहान ने टीम को बुलाया। “कटर लाओ।”

कबीर ने पैनल के किनारे खोजे। मीरा नाथ ने मदद की। कुछ ही मिनटों में पैनल का एक हिस्सा खुला। पीछे लोहे का दरवाज़ा था। ताले पर नंबर नहीं, सिर्फ एक छोटा प्रतीक बना था—एक कान, जिसके ऊपर क्रॉस।

**मौन।**

पायल पीछे हट गई। “वहाँ मत जाना। वहाँ आवाज़ वापस नहीं आती।”

नयना ने उसके सामने घुटनों के बल बैठकर कहा, “पायल, जिसने तुम्हें फोन दिया, वह अंदर है?”

पायल ने सिर हिलाया। “सुर दीदी। वह गाती नहीं। बस सुनती है।”

“क्यों?”

“क्योंकि अगर वह गाए तो दीवारें काँपती हैं।”

कबीर ने धीमे कहा, “यह बच्ची रूपक बोल रही है या सच में?”

मीरा नाथ ने कहा, “कभी-कभी कैद बच्चे सच को रूपक में ही बोल पाते हैं।”

फरहान ने ताला तोड़ने का आदेश दिया।

लोहे पर चोटें पड़ीं। पहली। दूसरी। तीसरी।

ताला भारी था। फिर कटर आया। चिंगारियाँ निकलीं। पायल ने कान बंद कर लिए। नयना ने उसे सीने से लगा लिया।

दरवाज़ा खुला।

अंदर अँधेरा था।

पूरी तरह नहीं—छत से बहुत हल्की सफेद रोशनी गिर रही थी। कमरा लंबा था। दीवारों पर मोटे ध्वनि-पैनल। बीच में एक कुर्सी। कोने में पानी की बोतल। जमीन पर चॉक से बनी लकीरें। और दीवार पर नाखून से लिखे बहुत छोटे शब्द—

**नाम नहीं, सुर याद रखना।**

कुर्सी पर कोई नहीं था।

फरहान अंदर गए। “खाली।”

नयना ने कमरे में कदम रखा। हवा भारी थी। जैसे आवाज़ों को सोख-सोखकर यह कमरा खुद बहरा हो गया हो।

मीरा नाथ दीवार के पास गई। “यहाँ कोई लंबे समय रहा है।”

कबीर ने जमीन पर पड़ा छोटा कपड़ा उठाया। नीला दुपट्टे का कोना। उसमें कुछ लिपटा था।

एक छोटा मेमोरी कार्ड।

उस पर हाथ से लिखा था—

**SUR — अगर पायल बच जाए तो यह चलाना।**

नयना ने पायल की तरफ देखा। “तुम जानती हो यह?”

पायल ने सिर हिलाया। “सुर दीदी ने कहा था—जब बाहर वाली दीदी आए तो देना। पर मैं डर गई। छिपा दिया था।”

कबीर ने मेमोरी कार्ड सावधानी से लिया। “ऑफलाइन मशीन चाहिए।”

फरहान ने कहा, “यह साक्ष्य है।”

कबीर ने कहा, “और शायद अगली जान बचाने का रास्ता भी। कॉपी आपके सामने बनाते हैं।”

रिकॉर्डिंग कक्ष के सिस्टम को नेटवर्क से काट दिया गया था। कबीर ने एक सुरक्षित लैपटॉप निकाला, फरहान की निगरानी में कार्ड लगाया। स्क्रीन पर सिर्फ एक ऑडियो फाइल थी।

**SUR_MESSAGE.wav**

सब चुप हो गए।

कबीर ने पूछा, “चलाएँ?”

नयना ने पायल को अपने पास बैठाया। मीरा नाथ उसके दूसरी तरफ। फरहान रिकॉर्डिंग ऑन कर चुके थे।

कबीर ने प्ले दबाया।

पहले लंबी खामोशी।

फिर एक औरत की आवाज़ आई।

बहुत धीमी।

बहुत साफ़।

उस आवाज़ में कोई भजन नहीं था, कोई मंच नहीं था, कोई भय नहीं था। वह ऐसी आवाज़ थी जो बहुत दिनों से बोलना नहीं चाहती थी, पर अब बोलना जरूरी हो गया था।

“अगर यह रिकॉर्डिंग बाहर पहुँची है, तो पायल ने डर से बड़ा काम किया है।”

पायल रोने लगी। “सुर दीदी…”

रिकॉर्डिंग जारी रही—

“मेरा नाम मुझे पूरा याद नहीं। वे मुझे सुर कहते हैं क्योंकि मैंने अपने सारे नाम गाना बंद कर दिए थे। मैं उन बच्चों में से हूँ जिन्हें आवाज़ प्रशिक्षण के लिए रखा गया। मैं भाग सकती थी, पर पायल जैसी बच्चियाँ यहाँ रह जातीं। इसलिए रही।”

मीरा नाथ की आँखें भीग गईं।

आवाज़ ने आगे कहा—

“नयना, अगर तुम यह सुन रही हो, तो तुम्हारी आवाज़ यहाँ बहुत पहले आ चुकी है। तुम्हारी बचपन की रिकॉर्डिंग, अरविंद अवस्थी की आवाज़, मीरा नाथ के भजन, कई बच्चों की रोती हुई आवाज़ें—इन सब पर ईशान ने मॉडल बनाए। वह भैरव से अलग है। भैरव सत्ता चाहता है। ईशान ध्वनि पर ईश्वर बनना चाहता है।”

कबीर ने धीमे कहा, “खतरनाक आदमी।”

रिकॉर्डिंग में सुर ने कहा—

“VOICE_19_SOURCE_MASTER की असली कॉपी यहाँ नहीं। यह सिर्फ वर्किंग कॉपी है। मास्टर लखनऊ से हट चुका है। उसे ‘कानपुर रूट’ भेजा गया है। वहाँ से शायद बाहर।”

नयना ने फरहान की तरफ देखा। उन्होंने तुरंत नोट किया।

फिर सुर की आवाज़ थोड़ी काँपी।

“और सबसे जरूरी बात। मैं वह नहीं हूँ जिसे तुम खोज रही हो, लेकिन मैं उसकी आवाज़ जानती हूँ। लखनऊ के पुराने स्टूडियो में एक रिकॉर्डिंग है—एक बच्चे की नहीं, एक वयस्क औरत की। वे उसे ‘माधवी टेस्ट’ कहते थे।”

अदिति राणा की बहन।

कबीर ने नयना की तरफ देखा।

रिकॉर्डिंग में आवाज़ आई—

“माधवी जिंदा थी। कम से कम तीन साल पहले तक। उसे आवाज़ प्रशिक्षण नहीं, आवाज़ अनुवाद में इस्तेमाल किया गया। कई भाषाएँ, कई पहचान। अगर अदिति राणा सच में तुम्हारे साथ है, तो उसे यह बताना—उसकी बहन ने आखिरी रिकॉर्डिंग में एक ही वाक्य कहा था…”

कमरे में सबकी साँस रुक गई।

सुर की आवाज़ ने वह वाक्य दोहराया—

“दीदी को कहना, मैंने अपना नाम नहीं बेचा।”

ऑडियो कुछ पल चुप रहा।

फिर अंत में सुर ने बहुत धीमे कहा—

“मुझे लेने मत आना। अगर मैं रहूँगी, तो वे मुझे ढूँढ़ लेंगे। अगर मैं गायब रहूँगी, तो शायद कुछ बच्चों को रास्ता दिखा सकूँगी। आवाज़ नंबर 19 अब सिर्फ नामों की नहीं, आवाज़ों की भी लड़ाई है।”

एक लंबा विराम।

फिर आखिरी फुसफुसाहट—

“पायल को उसका गीत वापस दे देना।”

रिकॉर्डिंग खत्म।

कमरे में कोई नहीं बोला।

पायल नयना की गोद में मुँह छिपाकर रो रही थी।

मीरा नाथ दीवार को देख रही थी, जैसे वह अपने पुराने कमरे में लौट गई हो। कबीर का चेहरा गंभीर था। फरहान अली का जबड़ा कस गया था। उन्होंने तुरंत फोन उठाया।

“अदिति मैडम को लाइन पर लाइए,” उन्होंने कहा।

नयना ने पूछा, “अभी?”

“हाँ,” फरहान बोले। “उनकी बहन का नाम इस केस में आ गया है। उन्हें अधिकारी रहते हुए यह सुनना होगा।”

कुछ ही सेकंड में अदिति की आवाज़ स्पीकर पर आई। “हाँ, फरहान?”

फरहान चुप रहे। फिर बोले, “मैडम, आपको बैठकर सुनना चाहिए।”

ऑडियो फिर चलाया गया।

जब सुर ने कहा—“दीदी को कहना, मैंने अपना नाम नहीं बेचा”—लाइन के उस पार कुछ नहीं सुनाई दिया।

न कोई रोना। न कोई सवाल।

सिर्फ लंबी चुप्पी।

फिर अदिति राणा की आवाज़ आई। पहले से अलग। बहुत धीमी।

“फाइल सुरक्षित करो। किसी को मत देना। मैं लखनऊ आ रही हूँ।”

नयना ने फोन की तरफ देखा। उसे लगा, आवाज़ नंबर 19 की टीम में एक और निजी घाव खुल गया है।

और निजी घाव, अगर सच के साथ खड़े हो जाएँ, तो वे बहुत खतरनाक हो सकते हैं।

फरहान ने कहा, “मैडम, प्रोटोकॉल—”

अदिति ने काट दिया। “मैं प्रोटोकॉल लेकर ही आ रही हूँ।”

कॉल कट गई।

कबीर ने धीरे से कहा, “अब लखनऊ सिर्फ छापा नहीं रहा।”

मीरा नाथ ने कहा, “यह आवाज़ों का कब्रिस्तान है।”

नयना ने पायल के सिर पर हाथ फेरा। “और कब्रिस्तान से भी नाम लौटते हैं।”

पायल ने आँसू पोंछे। “सुर दीदी आएँगी?”

नयना चुप रही।

वह झूठ बोल सकती थी। कह सकती थी—हाँ, आएँगी। पर उसने झूठ बहुत झेले थे। वह किसी बच्चे को झूठ से नहीं बचाना चाहती थी।

“हमें उन्हें ढूँढ़ना होगा,” उसने कहा। “लेकिन पहले तुम्हें सुरक्षित करना है।”

पायल ने पूछा, “मेरा गीत रहेगा?”

नयना ने उसका हाथ पकड़ा। “हाँ।”

मीरा नाथ ने कहा, “हम इसे रिकॉर्ड करेंगे। तुम्हारी अनुमति से। ताकि कोई फिर कहे कि तुम प्रीति हो, तो तुम्हारी अपनी आवाज़ जवाब दे।”

पायल ने थोड़ा सोचा। फिर सिर हिलाया।

कबीर ने बहुत नरमी से माइक रखा। “जब मन हो तभी।”

पायल ने आँखें बंद कीं।

कमरा चुप हो गया।

फिर उसकी छोटी, काँपती, पर अपनी आवाज़ उठी—

“आम के पेड़ तले… नदिया बोले रे…”

इस बार कोई मशीन नहीं थी। कोई ओवरराइट नहीं। कोई नकली नयना नहीं। कोई आदेश नहीं।

सिर्फ पायल।

उसकी आवाज़ टूट रही थी, फिर भी लौट रही थी।

नयना ने महसूस किया—यही असली लड़ाई है।
हर बच्चे को उसका गीत वापस देना।
हर आवाज़ को उसका मालिक लौटाना।
हर नकली आवाज़ के पीछे छिपे असली गले तक पहुँचना।

गीत खत्म हुआ।

कबीर ने रिकॉर्डिंग सेव की। फाइल नाम टाइप किया—

**PAYAL_ORIGINAL_VOICE_ANCHOR.wav**

फिर उसने नयना की तरफ देखा। “अब?”

नयना ने स्क्रीन पर SUR_MESSAGE, VOICE_19_SOURCE_MASTER, MADHAVI_TEST, KANPUR_ROUTE—इन शब्दों को देखा।

“अब,” उसने कहा, “कानपुर।”

फरहान ने कहा, “और अदिति मैडम।”

मीरा नाथ ने पूछा, “और ईशान?”

कबीर ने बाहर पुलिस के बीच खड़े ईशान को देखा। वह हथकड़ी में था, फिर भी शांत था। जैसे उसे पूरा यकीन हो कि उसकी आवाज़ें उससे पहले पहुँच चुकी हैं।

“ईशान को बोलने मत देना,” कबीर ने कहा। “यह आदमी बोलकर कमरे का सच बदल सकता है।”

नयना ने धीरे से कहा, “तो उसकी हर बात रिकॉर्ड करो।”

ईशान बाहर से उनकी तरफ देख रहा था।

उसके होंठ हिले।

काँच के पार आवाज़ नहीं आई, पर नयना ने शब्द पढ़ लिए—

“तुम्हारी आवाज़ अगली है।”

नयना ने उसकी तरफ देखा।

फिर उसने पायल की रिकॉर्डिंग अपने हाथ में ली और उत्तर दिया—

“पहले यह आवाज़ सुन।”

ईशान की मुस्कान थोड़ी कम हुई।

और नयना को समझ आया—

आवाज़ बनाने वाले को हराने का पहला तरीका है—

उसे असली आवाज़ सुनाना।

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