Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

बरसात और जुकाम This post in Under Review

संदीप कुमार सिंह 07 Jul 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह सामाजिक कविता बरसात और जुकाम पर है जिसमें कैसे बरसात का आनंद लें और सर्दी-जुकाम से खुद को कैसे बचाएं. 681 0 Hindi :: हिंदी

जब नहीं आ रही थी बरसात,
तब तो बहुत ही इंतजार था।

जब आ गई अपने रूप में,
होने लगी घमासान वारिश।

पानी ही पानी छा गई चारों तरफ,
लोग_बाग सब तरबतर हो गए।

फिर जुकाम ने अपना,
लगा दिया है भारी पहड़ा।

घर_घर में लोग ग्रसित है,
जुकाम भी बढ़ता ही जा रहा है।

फिर अदरक वाली चाय,
सबको याद आने लगी है।

जिसे नहीं पसंद,
उसको भी पीना मजबूरी है।

नहीं तो जुकाम बढ़ता ही जायेगा,
 मजा सारा बेकार हो जायेगा।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार  सिंह*Author*

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: