सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को
तू है कामिल रचा-ए-हयात को
ये अर्ज़-ए-नियाज़-ए-मुहब्बत भी क्या है
बढ़ा दे तू अब मेहर-ओ-सौग़ात को
सलाम-ए-कायनात-ए-� read more >>
तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?
तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?
read more >>