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"स्याही" "एक अरसा हो गया है,तुम्हें कागज पर उतारे हुये लगता है,तुम्हारी यादों की स्याही सूख के बेजान हो गई है" #Mukesh Namdev read more >>
@असली शिक्षित तो जिंदगी करती है हमें, जो व्यवहार हम करते हैं वह हमें शिक्षा सिखाती है...!! read more >>
ज़मीं पर बैठ, कभी चलती, कभी फुदकती है। कभी खा़मोश, कभी खालसा- सा गाती, कहां सुनती है? कभी फुर- फुर फुरती में। कभी सघन में सघन ढूंढ़ती है read more >>
क्या फर्क है ...... ? अब किसी के सच, और झुठ में ............! तेरे फैसले ने ............! वैसे भी ,मेरी किस्मत बदल दी ।।राज।। read more >>
तेरे फसलों को कबूल करते-करते अब दिल की चाहत खत्म हो गई। ना मालूम क्यों.......... पर अब राहत खत्म हो गई ।। read more >>
तारीखें तय कर , इम्तिहान अभी......और ....बेजार होंगे....! मुश्किल में है । मुकद्दर के सिकन्दर का अब हर ख्वाब ... अपने फैसले पर ज़रा ग़ौर कर.....! read more >>
एक सच्चा झुठ तेरा ...... तुझे बेपर्दा क्या.....करता ? दर्द के उन पलों की औकात में एक तेरा ही चेहरा देख रहें थे .......हम । read more >>
दौलत ही दौलत बिखरी है । रास्तों पे, खूबसूरत एक निर्माण और होगा चाहत की वसीयत पे . क्या लिखु......? अपनी मुहोबत की सुंदरता जानती हो तुम.. ....... read more >>
दोस्त एक बार सुन तुझे उसकी खामोशी की खबर है । क्या .......? चाहत है उसे , मुहोबत है ।उसे , चाहें तो नब्ज देख लें !।। 2।। राज ।। read more >>
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