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कलम की ताकत

नए व् उभरते रचनाकारों को एक ऐसा मंच प्रदान करने का प्रयास है जहां से वो प्रत्यक्ष रूप से जनता तक पहुँच सके और स्वप्रेरित होकर आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिल सके।

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तुझे ताकू ऐसा दिन आए खुदा ऐसी नहमत सब पर फरमाए ।। read more >>
आज मौसम फिर सुहाना हो गया लगता है तुमसे मिलने का बहाना फिर पुराना हो गया।। read more >>
આપણા નિર્ણયો ઘણી વાર આપણને હરાવી જાય છે, જ્યાં જીતવું હોય જીવનમાં, ત્યાં જ અટકાવી જાય છે. સમય તો સૌને સરખો મળે છે જીવનની સફરમાં, કોઈ એન read more >>
थोड़ा कर्म फरमा मेरे मालका हर बार मिंजो मत सता मेरे दाता ।। read more >>
बादल फिर मँडराए खुदा जाने अब की बार कौन सा रहम फरमाए।। read more >>

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जिस रास्ते पे चल रहे उस पर है छल परे कुछ देर के लिए माथे पे बल परे हम सोचने लगे कि लौट चले क्या फिर सोचा यार छोड़ो चल परे तो चल परे मुश्� read more >>
“मुसीबत में की गई मदद और बाद में उसकी शिकायत, आपके नेक कर्म के फल को भी खट्टा बना देती है।” धन्यवाद read more >>
खुदा रहम मेरी जान पर ऐसा करार कराए फिर मेरी मां पर।। read more >>
कहानी शीर्षक : आशा एक गाँव में आशा नाम की एक महिला रहती थी I वह उस गाँव की स्वास्थ्य कार्यकर्ता थी I वह गाँव के � read more >>
स्टेशन पे बैठके देखता रहता हू गुजरती हूई रेलगाड़ियों को कोई तो खबर ला दे मेरे यार की। आते जाते मुसाफिरो से पुछा करता हू, वैसे तो हर गल� read more >>
[Intro — धीमा, गंभीर] जब सच की आवाज़ दबाई जाए, जब हक़ की राह रुकाई जाए, जब अन्याय सामने आ जाए— तो ख़ामोश रहना कैसा? उठो...! [Verse 1 — धीरे-धीरे जोश ब� read more >>

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