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तुम्हें देख कर

मोती लाल साहु 13 Sep 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #प्रेम #महोब्बत #हुस्न #शायरी 15965 1 5 Hindi :: हिंदी

तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?

​तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?

​रंगीन है तुम से ये पूरा ज़हान,
बग़ैर तुम्हारे, कहाँ है ये जहां?

​तुम्हें देख के लगता है, जैसे कोई
हूर उतरी हो फ़लक से, ये क्या है?

​तुम ख़ुद ही हो एक करिश्मा,
खुदा की कुदरत, ये क्या है?

​तुम ख़ुद ही हो एक ग़ज़ब,
अल्फाज़ भी तुम पे कम हैं, ये क्या है?

​ये जो दिल में मेरे आज है,
ग़ज़ब का आलम, ये क्या है?
-मोती

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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु कवि के भाव: शेर न०-1. तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का, गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है? ​इस शायरी में कवि अपनी प्रेमिका को देखकर अपने दिल में उमड़ रहे प्रेम और खुशी का वर्णन कर रहे हैं। कवि कहते हैं कि उन्हें देखकर उनका दिल फूल की तरह खिल गया है। उनके चेहरे पर जो लाली या रंग है, वह इसी खुशी और प्रेम का प्रतीक है। कवि आश्चर्य से पूछते हैं कि यह कैसा अनुभव है। शेर न०-2. ​तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल, नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है? ​यह शायरी प्रेमिका की सुंदरता की तारीफ करती है। कवि कहते हैं कि उनकी प्रेमिका खुद में एक पूरी ग़ज़ल की तरह हैं। उनकी सुंदरता और अदाएँ इतनी मनमोहक हैं कि वे सुबह (सहर) की तरह खूबसूरत और व्यवस्थित (नज़्म) हैं। कवि इस अद्भुत सुंदरता पर हैरान होते हैं। शेर न०-3. ​रंगीन है तुम से ये पूरा ज़हान, बग़ैर तुम्हारे, कहाँ है ये जहां? ​इस शेर में कवि अपनी प्रेमिका को अपने जीवन और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ मानते हैं। वे कहते हैं कि उनके बिना यह दुनिया बेजान और रंगहीन है। प्रेमिका के होने से ही उनके जीवन और दुनिया में रंग और खुशियाँ हैं। शेर न०-4. ​तुम्हें देख के लगता है, जैसे कोई हूर उतरी हो फ़लक से, ये क्या है? ​यह शायरी प्रेमिका की सुंदरता को एक दैवीय रूप देती है। कवि कहते हैं कि उनकी प्रेमिका इतनी सुंदर हैं कि उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो कोई हूर (स्वर्ग की अप्सरा) आसमान (फ़लक) से उतरकर ज़मीन पर आ गई हो। कवि इस अलौकिक सुंदरता को देखकर चकित हैं। शेर न०-5. ​तुम ख़ुद ही हो एक करिश्मा, खुदा की कुदरत, ये क्या है? ​इस शायरी में कवि अपनी प्रेमिका को ईश्वर की बनाई हुई सबसे अद्भुत और अनोखी कृति मानते हैं। वे कहते हैं कि उनकी प्रेमिका एक करिश्मा हैं और ईश्वर की कलाकारी का एक जीता-जागता उदाहरण हैं। कवि यह देखकर अचंभित होते हैं कि ईश्वर ने इतनी सुंदर रचना कैसे की। शेर न०-6. ​तुम ख़ुद ही हो एक ग़ज़ब, अल्फाज़ भी तुम पे कम हैं, ये क्या है? ​यह शायरी प्रेमिका की सुंदरता और प्रभाव का वर्णन करती है। कवि कहते हैं कि उनकी प्रेमिका इतनी अद्भुत (गज़ब) हैं कि उनकी तारीफ में कहे गए शब्द भी कम पड़ जाते हैं। उनकी सुंदरता को बयान करने के लिए कोई भी शब्द काफी नहीं है। शेर न०-7. ​ये जो दिल में मेरे आज है, ग़ज़ब का आलम, ये क्या है? ​यह शेर कवि की भावनाओं का सारांश है। कवि अपनी प्रेमिका को देखकर अपने दिल में जो गहरा और अनोखा एहसास महसूस करते हैं, उसे वे खुद समझ नहीं पाते। वे कहते हैं कि उनके दिल में आज एक गज़ब का आलम (अद्भुत और गहरा अनुभव) है और वे आश्चर्य से पूछते हैं कि यह क्या है। यह भाव प्रेम की गहराई और तीव्रता को दर्शाता है। -मोती

8 months ago

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