संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह मुक्तक कविता समाज हित में बहुत ही उपयोगी है. इसे पढ़कर आप जीवन जीने की कला से रुबरू होंगे. 346 0 Hindi :: हिंदी
मुक्तक धीरज धरना सीख लें,सुनता कौन पुकार l जीना है तो जान लें, करना होगा प्यार l नम क्यों करते आँख को,पल में बदले हाल= रखें इरादा सख्त तो,जीवन हो गुलजार ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....