संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह मुक्तक कविता समाज में पर्याप्त दुष्ट लोगों से सावधान रह कर आप अपनी मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं. 335 0 Hindi :: हिंदी
सीख लिया है जग में जीना,सीख लिया है प्यारl प्यार बिना भी क्या जीना है,प्यार जगत आधार l नहीं प्यार को जो रखता है,होता है कंगाल= जैसे को तैसा है मिलता,स्वर्ग बना परिवार ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....