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सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल

मोती लाल साहु 01 Oct 2025 गीत प्यार-महोब्बत #इश्क़ #दीदार #सूफ़ी #मुहब्बत #समर्पण #Moti #हिंदीग़ज़ल #नज़्म #गीत 16719 1 5 Hindi :: हिंदी

सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को
तू है कामिल रचा-ए-हयात को

​ये अर्ज़-ए-नियाज़-ए-मुहब्बत भी क्या है
बढ़ा दे तू अब मेहर-ओ-सौग़ात को
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को...

​तेरी एक नज़र की तलब है अज़ल से
समर्पित ये दिल और जज़्बात को
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को...

​अधूरा हूँ मैं तेरे दीदार के बिन
मिले चैन कब इन परेशान रात को
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को...

​फिरे दर-ब-दर दिल तिरी जुस्तजू में
नज़र आए अब अपनी हर बात को
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को...

​न दे 'मोती' दूरी की कोई सज़ा अब
बना ले तू अपनी किसी घात को
​सिर्फ मेरे लिए पूरे जहान को
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को।
-मोती

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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु गीत के भाव: यह नज़्म ईश्वर, एक आदर्श या परम प्रिय के प्रति प्रेम, समर्पण और मिलन की तीव्र इच्छा को व्यक्त है। अपने महबूब/ख़ुदा की पूर्णता ('कायनात-ए-कमाल' और 'कामिल') को सलाम किया है और उनसे कृपा, दीदार, और मिलन की भीख माँग रहा है, क्योंकि उनके बिना जीवन अधूरा और बेचैन है। -मोती

8 months ago

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