प्रवीण कुमार 10 Oct 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत 7219 0 Hindi :: हिंदी
तेरे से मेरा कल भी जवां। तेरे से मेरा आज़ भी जवां। उम्मीद तो दिल में हैं। इस उम्मीद से मेरी जिंदगी जवां। लौहे की जंजीरियां कहां? इरादों की परवाह यहां। सपनों की बात नहीं, संकल्प की, अपनों की; आवाजें सुन ली जाती हैं यहां। तेरे से मेरा कल भी जवां। तेरे से मेरा आज़ भी जवां। कोई कुदरत का नूर ही तुम। मेरी सच्चाई का गुरुर ही तुम। ज़माने की हक़ीक़त ही तुम। इस हक़ीक़त से मेरी आवाज़ भी जवां। तेरे से मेरा कल भी जवां। तेरे से मेरा आज़ भी जवां। उम्मीद तो दिल में हैं। इस उम्मीद से मेरी जिंदगी जवां।