हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा,
पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे।
मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात,
हर दिल की धड़कन में मैं� read more >>
ज़मीं ये आसमाँ का हर नज़ारा उसी से,
जो गुमसुम हों, मिला हर सहारा उसी से।
कोई सहरा में भटके तो, मंज़िल बता दे,
जो हर मुश्किल में रहे, वो क� read more >>