Anilkumar Rathwa (Sameer) 19 Sep 2025 कविताएँ अन्य पढ़ो, आगे बढ़ो 12063 0 Hindi :: हिंदी
पढ़ो, आगे बढ़ो, मंज़िल खुद बुलाएँगी। मेहनत की सीढ़ियों पर, कामयाबी मुस्कुराएँगी। ज्ञान का दीप जलाओ साथी, अज्ञान के अंधियारे मिटाओ। किताबों को हथियार बनाकर, भविष्य का सूरज जगमगाओ। जो कलम उठाता है सच्चे मन से, वो भाग्य को बदल देता है। कक्षा में सीखी हर शिक्षा, जीवन में रंग भर देता है। पढ़ो, आगे बढ़ो, कदम कभी न थमने पाओ। राहें चाहे हों काँटों भरी, सपनों से समझौता न कर पाओ। लक्ष्य अगर ऊँचा रखना है, तो संघर्ष भी गहरा होगा। लेकिन हर कठिनाई के आगे, साहस से ही सवेरा होगा। दुनिया कहेगी – रुक जाओ, तुम कहना – “मैं थकूँगा नहीं।” वो कहेंगे – “मंज़िल दूर है”, तुम कहना – “मैं रुकूँगा नहीं।” हर पन्ना जो तुम पढ़ते हो, वो कल नया इतिहास लिखेगा। हर कदम जो तुम बढ़ाते हो, वो कल तुम्हें आकाश दिखेगा। तो साथियो, आज से एक ही गीत गाओ – पढ़ो, आगे बढ़ो, सपनों को सच बनाओ। मंज़िल तुम्हें पुकार रही है, भविष्य तुम्हें सँवार रहा है। बस अपने हौसले बुलंद करो, जीवन तुम्हें निखार रहा है। पढ़ो, आगे बढ़ो, मंज़िल खुद बुलाएँगी। मेहनत से डरना कैसा? कामयाबी कदम चूमेंगी।