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कृषि विश्वविद्यालय की गूँज

Anilkumar Rathwa (Sameer) 19 Sep 2025 कविताएँ अन्य कृषि विश्वविद्यालय की गूँज 10434 0 Hindi :: हिंदी

साथियो,
आओ आज मिलकर हम प्रण करें,
कि धरती माँ का मान बढ़ाएँगे,
कृषि शिक्षा की ज्योति जलाकर,
हर गाँव को हरियाली से सजाएँगे।

किसान हमारे अन्नदाता हैं,
जो पसीने से जीवन सींचते हैं।
पर ज्ञान और तकनीक के बिना,
वे कितनी कठिन राहें खींचते हैं।
इसलिए ज़रूरी है, हम सब मिलकर,
कृषि शिक्षा को खेत-खेत पहुँचाएँ।

छात्रो,
तुम्हारे सपनों में जोश है,
तुम्हारे हाथों में बदलाव की शक्ति है।
कृषि विश्वविद्यालय के आँगन से,
तुम विज्ञान और परंपरा का संगम लेकर,
गाँव की तस्वीर बदल सकते हो।

यह विश्वविद्यालय कोई इमारत नहीं,
यह तो सेवा का मंदिर है।
जहाँ हर शोध किसान के लिए है,
हर प्रयोग धरती माँ के लिए है।

आओ,
हम सब मिलकर ये वचन लें,
कि किसान का पसीना व्यर्थ न जाए,
छात्र का परिश्रम सार्थक बने,
और विश्वविद्यालय का गौरव
पूरे भारत में गूँज उठे।

धरती माँ पुकार रही है –
“आओ मेरे बेटो, मेरी लाज बचाओ,
ज्ञान और कर्म की जोत जलाकर,
भारत को अन्नभंडार बनाओ।”

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