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ग़ज़ल
उसका नाम
संमुदर पायाब हो गये और नदियाँ उफान पर है पर अभी तक उसका नाम मेरी जबान पर है उसने अपने तरकस के सारे तीर छोड़ दिये मुझ पर पर मेरे तीर �
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आगाज़
आइए बैठकर कुछ बात किया जाए' दिले कशमकश को समाप्त किया जाए! दूरियां नजदीकियां कुछ भी नहीं रहा' अब एक नई मंजिल तलाश किया जाए! हर कि�
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यह कर पाओगे क्या
कुछ बताना है तुम्हें मेरे बिना बोले सुन पाओगे क्या इश्क होने का दावा करते हो तुम अगर मैं कभी मजबूर हुई तब अकेले निभा पाओगे क्या चुनना
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महोब्बत
कल्पनाओं में सफर सभी करते हैं। लेकिन मायने हकीकत के होते हैं।। बाजार में हर एक चीज बिकती हैं। मोल-भाव वहाँ जरूरत के होते हैं।। हर आद
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जिंदगी से बिछड़ गए
जो जिंदगी मुझसे बिछड़ी, मैं भी किसी की ना रही | बिछड़ के जिंदगी से जिंदगी, जीने का सलीका ना रहा| अचानक जिंदगी से निकल गया नाम उनका | स�
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रिश्तेदार
आधे से ज्यादा रिश्तेदार धोखेबाज होते है, चहरे पर उनके नकाब होते है, मुसीबत मैं ही रिश्तेदारों के पहचान होते है
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अधूरी मोहब्बत
कुछ बात अधूरी है' मुलाकात अधूरी है! दुनिया के नजरों में' तालुकात अधूरी है! थोड़ी सी रहम कर दे' इस दिल को नरम कर दें! इस द�
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माँ
तुम सा बढ़कर ओर नहीं। मिलता कोई छोर नहीं।। खिलती अब जो देख सकू। आँगन तुम सी भोर नहीं।। हँसता जीवन छाँव तले। ऐसी मिलती ठौर नहीं।। खु
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जिंदगी को जीने के बहाने मिले हैं
जिंदगी को भी कोई वजह मिल गई है न जाने वक़्त ने यह कैसे जीने के बहाने दिए हैं कभी जिनके गलियों से गुजरने के बहाने ढूंढते थे वही आज म�
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मां
रिश्तों का क्या , उस फरिश्ते से रिश्ता हैं ना खोज ले तू सारे जमाने में , मां से बड़ा कोई फरिश्ता है क्या ! बिना मतलब के रिश्ता निभाएं ब�
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क़भी वापस ना आऊँगा मैं
चाहता हूँ कही दुर चला जाऊँ मैं जहां कोई ना अपना हो बस अपना एक प्यारा सामठ होगा जहां मै और उसकी यादों रहेंगी उसकी तस्वीरों को दीवारों
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गजल--नजर से नजर मिला नहीं सकते
ग़ज़ल नजर से नजर मिला नहीं सकते, जब खुद की नजरों से गिर गए। झूठी शान शौकत की जादूगरी से, बजूद अपना ही मिटाते चले गए। डगमगाए
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