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Sudha Chaudhary
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आते हैं विचार
आते हैं विचार जब सोना था तब हो न सके अब भी जाग रहे बिना आधार आते हैं विचार। कौन रहा अब पथ का साथी बीत गयी जब सुख की बाती, निर्णय का वह क
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अंकुश लगेगा कब उन बेरहम दरिंदों पर
क्या सुरक्षित है अपनी बेटियां। क्यों नहीं सुरक्षित हैं बेटियां। अंकुश लगेगा कब उन बेरहम दरिंदों पर जिसने छीना है उसकी मासुमियत क�
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विश्वास का भारीपन अविश्वसनीय
विश्वास का भारीपन अविश्वसनीय हो रहा है। स्वप्न की मृदु धरा पर जागरण हो रहा है। मेरी कृति की कल्पना से विशालकाय तुम, पर तुम्हारे आचर�
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कहां रहते हैं विश्व विख्यात
तुम कौन! जिसके रहस्य में डूबा जग सारा। सृष्टि के कण कण में जो विद्यमान कहता है जग सारा। अटल है जिसकी बातें, चुन रहा जो फूलों में हास , प
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समापन प्रारंभ लायेगा-जो जायेगा वो आयेगा
समापन प्रारंभ लायेगा जो जायेगा, वो आयेगा। खुशी का क्षण हो , या दुख की व्यथा, संयम साथ आयेगा। आगे पीछे का , कोई स्वर न होगा। दिशा भ्रम न �
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साथ तुमने दिया-और क्या चाहिए
साथ तुमने दिया और क्या चाहिए। हमको अपने मिलन का क्षितिज चाहिए। सुख की किरणें बिखरती हो पहले जहां, प्रेम की उस धुरी पर घर चाहिए। वफ़ा ज
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सखि कैसे भूलूं उनको-मेरे एकांत में भी हलचल है
सखि कैसे भूलूं उनको! दुखते जीवन का संसार, उन बिन कैसे जाऊं पार। यादों के उस छोर कोर को पुलकित मन को फिर झकझोर सस्नेह दिया भर भर मुस्कान
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समय था बलवान वही घूम आया
समय था बलवान वही घूम आया। जो जैसा किया वही भोग पाया। दो शब्द से वाक्य चार बन गये। सम्बन्धों की कटुता यूं ही बढ़ती गई नये संवाद बन गय
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मन क्यों उलझाएं-कांटों पर क्यों शीश झुकाएं
जिन्हें नहीं है प्रीति हमारी, उनसे मन क्यों उलझाएं। जीवन में रही विफलता तो, कांटों पर क्यों शीश झुकाएं। नहीं रहा अब शेष, तुम्हारे आल�
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कहीं विश्वास डूबा है यही अहसास हो
नहीं कहता है मन, इस भांति द्रवित हो। कहीं विश्वास डूबा है, यही अहसास हो। पग डिगे या फिर दिशाएं शुन्य हो जाएं, इस सुषुप्ति की व्यथा का फ
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