Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
  • Followers:
    12
  • Following:
    7
  • Total Articles:
    169
Share on:

My Articles

नहीं चुभता है,क ईबार बेगाने से, चलो हम डूब गए, किसी बहाने से। संग था,अपनापन था, जिन्दगी आसान थी, घिरे मझधार में ,नही बुलाने से। चलें जिस भ read more >>
समझ सकती हूं मैं है द्वंद जीवन का सरल हो रहा है हास विस्मय से विरल। कष्ट सृजन में नहीं उन्माद से देखो हो गया है ज्वाल भी अब काल। संवे� read more >>
मैं जो हूं एक तम, एक संशयात्मा, एक कठिन परिस्थिति, जिस पर रोज रहता है भर का डेरा, एक विराम जो रुक गया है। बरसों से एक उलझन जिस पर नहीं read more >>
वो क्षण जिसका नहीं कोई अर्थ किन्तु मुझे प्रिय है। ज़मीं हथेली पर जो सर्द रात वीथी वीथी कंप जाती जब कहीं किसी भी तरह किन्तु मुझे प्र read more >>
क्यों तुम्हारी नीर से आंख का काजल सजाऊं? क्यों तुम्हारी पीर से मैं कोई बादल बनाऊं? तुम विदा हो इसलिए हूं खड़ी इस भीड़ में, स्वप्न सुन् read more >>
जिंदगी खोजती है पैमाने, हर मोड़ पे मिल जाते हैं में खाने। इसे समझो ना शिकायत यह तरीका है पास लाने का आज हूं तो हवाएं भी मुड़ के आयेगी read more >>
तुम आते थे। झिम झिमबरसात की बूंदों से, अधखिले कपास के फूलों से, कलियों की किंचित छाया से, विचलित मन की प्रति छाया से, कहते सुनते अपने ध� read more >>
आज संकुचन को मिटाकर चलो पथ गामी बने। है धरा निस्तेज अलौकिक रूप के स्वामी बने। हदय पर यह बोझ कितना, था ही उसका साथ कितना, मन की इस विचलि� read more >>
मैं नहीं करुणा तुम्हारी आंसुओ का पुंज धोते ये नयन गिर रहे मोती हजारों सघन झड़ रहे ये फूल बता किस बात से दिख रही क्या पता कटुता तुम्हार read more >>
घर जिसे समझे थे वो मकान निकला अपने ही दर्द से सब बहा निकला। रिश्ते समझते समझते जिंदगी निकली अब तो कुछ समझने के काबिल भी नहीं। फर्क प� read more >>
Join Us: