Sudha Chaudhary 24 May 2023 कविताएँ अन्य 33694 0 Hindi :: हिंदी
समझ सकती हूं मैं है द्वंद जीवन का सरल हो रहा है हास विस्मय से विरल। कष्ट सृजन में नहीं उन्माद से देखो हो गया है ज्वाल भी अब काल। संवेदना लेकर कभी यह मन नहीं भरता मिले जो सहजता से वही है विफलता। सुधा चौधरी बस्ती