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मेरे प्रश्नों पर तुम चिन्ह लगाते जाते हो उत्तर अभिलाषा में साथ तुम्हारे आती हूं। मन व्याकुल पथ विचलित दिशाहीन हो जाते हो मन की अंधी read more >>
मां एक स्वप्न है जो साथ होती है पर नहीं होती मां एक सतह है जिससे उभरा है मेरा वजूद मां एक परछाई है जो शामिल है मुझ में मां जो कुछ है तु� read more >>
थोड़ा कहा थोड़ा सुना थोड़े-थोड़े में बड़ा हो गया कल तक जो कुछ किताबों में था आज सभी के घर कर गया मैंने जो कुछ कहा तुम्हारा ना था फिर भ read more >>
जो दीया जला था सीने में वो दिवस नहीं था जीने में ऐसी बोली तुम बोले थे जो गरल नहीं था पीने में। कितनी मादक जीवन झंझा गिरती उठती थम जाती � read more >>
देखकर विस्मय की छाया मुस्कुराहट ने आ घेरा हाथ अपने कुछ नहीं था मन में था विश्वास तेरा। छोड़कर झुरमुट की छाया आ बसे नयनों की माया मस्� read more >>
तुम्हें समेटे मन में अपने करते हर क्षण याद तुम्हें तुम वर्षा से, कभी धूप से छुपते हो इस नील गगन में। आओ जीवन में सुनहरी धूप से रुको हव� read more >>
कह रहा है मौन मेरा है यही आगाज कितने पन्नों पर मिटेगा विकल हदय का साथ। हो तरंगित तरल से मिट जाएगा हास कब तलक यूं बैठकर गाएंगे ऐ राग । read more >>
स्मृति मैं यह आज कौन मिलने आया लेकर दुर्गम पथ की छाया आज कौन कौतूहल लाया। हरे भरे इस जीवन में सन्नाटे को कौन बुलाया। स्मृति मैं आज कौ� read more >>
किसने देखा ताप में उर फिर सुगन्धित हो गया सुर । नवल निश्चल नयन अचम्भित भागते गिरते नहीं फिर । दिग दिशाएं झूमती सी कहां गई निर्मल हथेल read more >>
लिख रही दोपहर थी ठीक पीछे शाम थी । खुल रही परत परत अंतर वेदना पास थी। चल रही थी कोर कल्पित कल्पना की धार थी । मैं अंधेरी पाठशाला किस read more >>
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