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मन की अंधी कुटिया में

Sudha Chaudhary 15 May 2023 गीत अन्य 29539 0 Hindi :: हिंदी

मेरे प्रश्नों पर तुम
चिन्ह लगाते जाते हो
उत्तर अभिलाषा में
साथ तुम्हारे आती हूं।
मन व्याकुल पथ विचलित
दिशाहीन हो जाते हो
मन की अंधी कुटिया में
भ्रम में पिघली जाती हूं
आग हथेली पर ले 
बिन सुने जलाते हो
यही तमाशा है जीवन का
मन में कह कर रह जाती हूं।
कतरा कतरा जल जाएगा
आंसू नहीं रह जाएगा
तो निष्ठुरता की अति सीमा से
दूर चली जाती हूं।

सुधा चौधरी

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