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Sudha Chaudhary
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सूनी राहे पुकारती है -आंसुओं से कहीं गम के पैबंद
सूनी राहे पुकारती है आंसुओं से कहीं गम के पैबंद बिखर जाते हैं यही। रोज उठकर मुझे बुलाओगे कैसे सम्हलेंगे हालत यही टूट कर चूर हुई हूं
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ऐसा साथ निभाऊं क्या-जितना तुम घात लगते हो
जितना तुम घात लगते हो उतना मैं घात लगाऊं क्या जितना तुम साहस करते हो उतना मैं भेद बताऊं क्या। अपने अधिकार से बढ़कर मेरा अधिकार न मान�
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मगर तुम आग ही समझे-थे आंखों में आंसू
मेरे आने पर तुम जाओ मेरे जाने पर तुम आओ खुला यह हाल दिल का तो तमाशा करके मत जाओ। मेरी यादों की दुनिया भी तुम्हारा नाम से चलती तुम्हें
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भीगा मेरा मन-मैं लिखूं क्या ये
भीगा मेरा मन मैं लिखूं क्या ये तन कितनी लहरें आई रोका न गया ये मन। तेरे आने के बाद क्या कौन कहां आए भुला बिसरा है जो याद कहां से आए। म
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अपनी भाषा है हिंदी-कण-कण में मुस्काती हिंदी
कण-कण में मुस्काती हिंदी मेरे पथ की साथी हिंदी सहज भाव सिखलाती हिंदी हम सबको एक बनती हिंदी। हिंदी अपनी मौलिकता है हिंदी अपनी सहजता �
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मैं रह जाऊं मूक धरा-कब घट जाए प्यार तेरा
कब घट जाए प्यार तेरा मैं रह जाऊं मूक धरा कभी जागरण में देखा सपने तुम्हारे मन का कहीं सहजता छाई थी परियों सी चंचलता कहीं निपुणता रोक र�
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दुख का दामन जरा छुड़ा लो तो-मुझसे दूरी जरा बना लो तो
दुख का दामन जरा छुड़ा लो तो मुझसे दूरी जरा बना लो तो। क्या कहूं मैं जो बिखर जाऊंगी सोच कर बात ही बना लो तो। ये धुआं है थोड़ा और भी गहरा
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रात बसंती चादर ओढ़े-तारों के संग झिलमिल करती
रात बसंती चादर ओढ़े तारों के संग झिलमिल करती मैं बैठी यादों में तेरी रातों को पहरे देती। चुनकर मैने दीप जलाए तुम भूले लौट ना आए देख न�
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कान्हा नाम तेरा अनमोल-जो तुम्हें चाहे दुःख कट जाए
कान्हा नाम तेरा अनमोल जो तुम्हें चाहे दुःख कट जाए तुम हो लोक नायक प्रजा के रक्षक ब्रज के गलियों के छैला गोकुल के लाल दुलारे मथुरा के �
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यादों का झुरमुट खोल सखी-तेरे मन को बहुत ही भाएगा
यादों का झुरमुट खोल सखी तेरे मन को बहुत ही भाएगा जो भूल रूठा है तुमसे याद सहज आ जाएगा। मैं को मै से मत छीन सखी तेरी आदत में आ जाएगा तू ट
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