Sudha Chaudhary 23 May 2023 कविताएँ अन्य 25391 0 Hindi :: हिंदी
वो क्षण जिसका नहीं कोई अर्थ किन्तु मुझे प्रिय है। ज़मीं हथेली पर जो सर्द रात वीथी वीथी कंप जाती जब कहीं किसी भी तरह किन्तु मुझे प्रिय है। हर पीड़ा का एक बिन्दु निश्चित है जिसपर चलकर जल जाये मन पुष्कर सीमा का विकराल रूप तो तय है। किन्तु मुझे प्रिय है। सुधा चौधरी बस्ती