Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

अपने अंचल में सहज

Sudha Chaudhary 16 May 2023 गीत दुःखद 26361 0 Hindi :: हिंदी

मैं नहीं करुणा तुम्हारी
आंसुओ का पुंज धोते ये नयन
गिर रहे मोती हजारों सघन
झड़ रहे ये फूल बता किस बात से
दिख रही क्या पता कटुता तुम्हारी।
हंस रही थी प्रभा
थमरही थी निशा,
दामिनी कुछ कह रही थी
अपने अंचल में सहज,
मेरे अंतर में नहीं अब कहीं तृष्णा तुम्हारी।
भार बंधन का जो टूटा,
हृदय पर आभार फूटा,
श्वास में गर्जन नहीं
चित् की चिंगारीयो में ना रही वसुधा तुम्हारी ।
मैं नहीं करुणा तुम्हारी।



सुधा चौधरी

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

पढता था मैं दिन रात किताबे, तो कभी किताबों में ज़िंदगी का अर्थ ढूँढा करता था पर जीना तो मुझे ज़िंदगी की किताबों ने सिखाया कोई मतलब नही थ� read more >>
चक्रधारी सुनो विष्णु जी ओ तुम मेरे मन को भाए.....2 तुम कृष्ण रूप में आए मां बाप का बढ़ाए तुम राम रूप में आए मां बाप के वचन निभाए चक्रधार� read more >>
ये खुदा बता तूने क्या सितम कर दिया मेरे दिल को तूने किसी के बस मैं कर दिया वो रहा तो नहीं एक पल भी आकर टुकडें- टुकड़ें कर दिये ना विश्वा read more >>
Join Us: