Sudha Chaudhary 16 May 2023 गीत दुःखद 26361 0 Hindi :: हिंदी
मैं नहीं करुणा तुम्हारी आंसुओ का पुंज धोते ये नयन गिर रहे मोती हजारों सघन झड़ रहे ये फूल बता किस बात से दिख रही क्या पता कटुता तुम्हारी। हंस रही थी प्रभा थमरही थी निशा, दामिनी कुछ कह रही थी अपने अंचल में सहज, मेरे अंतर में नहीं अब कहीं तृष्णा तुम्हारी। भार बंधन का जो टूटा, हृदय पर आभार फूटा, श्वास में गर्जन नहीं चित् की चिंगारीयो में ना रही वसुधा तुम्हारी । मैं नहीं करुणा तुम्हारी। सुधा चौधरी