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सखि कैसे भूलूं उनको-मेरे एकांत में भी हलचल है

Sudha Chaudhary 12 Jun 2023 कविताएँ दुःखद 28181 0 Hindi :: हिंदी

सखि कैसे भूलूं उनको!
दुखते जीवन का संसार,
उन बिन कैसे जाऊं पार।
यादों के उस छोर कोर को
पुलकित मन को फिर झकझोर
सस्नेह दिया भर भर मुस्कान
पाषाणी बनूं उनसे मुख मोड़
हदय से कैसे करूं विछोह।

हाय ! वेदना भी दुर्दिन हैं,
अश्रु अश्रु मय है उच्छवास,
भर भर कर उसमें दृढ़ प्रेम प्रबल,
हत्या हो कैसे निज आज ,
क्षिति चुप आकाश मौन है,
मेरे एकांत में भी हलचल है।
कैसे उनका ध्यान हटाऊं।
सखि कैसे भूलूं उनको।



सुधा चौधरी
बस्ती

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