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कहीं विश्वास डूबा है यही अहसास हो

Sudha Chaudhary 11 Jun 2023 कविताएँ अन्य 30486 0 Hindi :: हिंदी

नहीं कहता है मन,
इस भांति द्रवित हो।
कहीं विश्वास डूबा है,
यही अहसास हो।
पग डिगे या फिर
दिशाएं शुन्य हो जाएं,
इस सुषुप्ति की व्यथा का
फिर कहां आगत हो।
स्वप्न में देखी हुई
उस कल्पना से दूर हो
चाहिए संसार से बढ़कर कोई जंजीर हो।
मन की मिट्टी में दबे
कौन हो तुम।
सृजन हो ,
या कोई सृजनकार हो।


सुधा चौधरी
बस्ती

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