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Raj Ashok

Raj Ashok

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@ raj-ashok-singh-23
, Rajasthan

Jai jai ho

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My Articles

क्या फर्क है ...... ? अब किसी के सच, और झुठ में ............! तेरे फैसले ने ............! वैसे भी ,मेरी किस्मत बदल दी ।।राज।। read more >>
तेरे फसलों को कबूल करते-करते अब दिल की चाहत खत्म हो गई। ना मालूम क्यों.......... पर अब राहत खत्म हो गई ।। read more >>
तारीखें तय कर , इम्तिहान अभी......और ....बेजार होंगे....! मुश्किल में है । मुकद्दर के सिकन्दर का अब हर ख्वाब ... अपने फैसले पर ज़रा ग़ौर कर.....! read more >>
एक सच्चा झुठ तेरा ...... तुझे बेपर्दा क्या.....करता ? दर्द के उन पलों की औकात में एक तेरा ही चेहरा देख रहें थे .......हम । read more >>
दौलत ही दौलत बिखरी है । रास्तों पे, खूबसूरत एक निर्माण और होगा चाहत की वसीयत पे . क्या लिखु......? अपनी मुहोबत की सुंदरता जानती हो तुम.. ....... read more >>
दोस्त एक बार सुन तुझे उसकी खामोशी की खबर है । क्या .......? चाहत है उसे , मुहोबत है ।उसे , चाहें तो नब्ज देख लें !।। 2।। राज ।। read more >>
हाथ की लकीरों में खज़ाने होते । तों मुकद्दर की क्या बिसात थी ।। हर कोई शहंशाह होता !! दुनियां में मेहनत पे ....... यकीन करने वालों की क्या औ� read more >>
हुस्न वाले हुस्न तराशते है ।। दौलत वाले दौलत तलाशते है । सिकन्दर के जहां में..........! समुद्र में रहने वाले भी प्यास जानते हैं ।। read more >>
जब तक खामोशी तेरी ये कुछ ना कहेंगी समझ.......!! तब तक बन्दा ये तेरी मुस्कान देखता रहेगा । । read more >>
तब तुम पसन्द थे । या तुम्हारी , रूह पसन्द थी ।। मुहोबत,के उस मीठे अहसास का सच आजतक कुछ पता नहीं..........??? read more >>
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