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Raj Ashok
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मुझे देख ले मां
मुझे देख ले मां मैं तेरे मंदिर आया हूं। भक्ति मेरी कर ले कबूल हाथों में लाल चुनरिया लाया हूं । मुझे देख ले मां मैं ........ बैठा हूं मैं भ�
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दुल्हन के चेहरे में
आज, तू, देख मुझे संहरे में और, मैं देखूं तुझे, दूल्हन के चेहरे में बना के दिल की धड़कनों के संगीत, नाच रहे बाराती, वक्त के इस पहले में �
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शक्ति का वरदान
तेरी भक्ति का वरदान...... मुझे है । । मां ..... तेरी शक्ति से वरदान मुझे है।। मां तू ही मेरी दुनियां तू ही मेरा है जहां म�
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तु जरा भी.....
तू जरा भी नहीं बदली मैं बदल गया हूं । बरसो के बाद देख के तुझको फिर फिसल गया हूं।। तू जरा भी...... कोई आज की सी बात लग रही है। बीते साल क
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डर पतंगे का
हम तो सूखी घास है । साहब डर पतंगे का हैं।। जाने कब राख हो जाए चलें थोड़ी सी हवा जरा से घुंऐ से आग हो जाए फिर तबाही में शामिल होगा । वों �
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नसीब की शिकायत
मेरी,..... मेरे नसीब की शिकायतों से तेरा क्या वास्ता ........! तुमने तो हमें ,बहुत पसंद किया था । कभी, हम ही तेरे काबिल नहीं थे ।।
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प्यार ही प्यार
उसकी हंसी में हमें कभी गुलजार नजर आया ।। कभी ऐतबार नजर आया।। कसम से, इतनी काबिल थी वो कि उसकी हर नजर में हमें हर बार प्यार ही प्यार नजर
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अपने काबिल
यों ,खुल्लेआम जब कभी , मिलन मुनासिब, नहीं था ।। तो क्यों , मिलना मुनासिब समझा ।। फिर,दर्द दिया इतना क्यों .... ? हमें अपने काबिल समझा।।
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लिखना तुझे है ।
लिखना तुझे है ।। चाहत के पन्नों पर समझना तुझे है । । मोहब्बत के पन्नों पर ये सफर जिंदगी है ।।मेरे हमसफ़र तेरी नजर में हमें रहना
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कौन सा खेल
चारों और मीठे शब्दों का मायाजाल फैला था । उसका हर एक शब्द पहला था । सरपरस्त, हम उल्झे थे ऐसे ।। सोचते हैं , आज तक उसने कौन सा खेल खेला थ�
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