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Raj Ashok

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@ raj-ashok-singh-23
, Rajasthan

Jai jai ho

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My Articles

अपनी दुनियाँ मे, कोई ,कैसे ? गुम ,हो गया । खुला था ! आसमाँ , देखते-दखते .वो सितारों को सो गया। अपनी दुनियाँ........... जाने कैसे ? बदला वक्त ज़िन� read more >>
सरहदे ,बंदिश बनी है। आज,तब - जब निभानी थी। मुझे, एक रस्म , संसार की, जो जोड़ देगी ,किसी दिल से मुझे अभी ,कुछ है । जिन्दा बची, ,ख्वाईशे मे� read more >>
ख्याली बुनियाद, पर आसमान के आंसू थे। देख मुहोबत ,कोई रहमों कर्म नहीं । read more >>
किसी जमाने मे, उस के इश्क़ मे , मे भी एक बाज पक्षी था। पर ,मेरे परर् तो तब कटे , जब उसने अपने दिल का , राज खोला । read more >>
कलम, तब बोलती है। जब मन मे विश्वास बोलता है। खामोश , आंख से इन्सान बोलता है। दिल ,ये तराजू ,के जैसे हर एक हिसाब तोलता है। वक्त ,की घड़ी read more >>
रौशनदानो की रोशनी मे, ये बड़ी -बड़ी किताबों मे अपना भविष्य डुढ़ते । नौजवान ....... मार्ग दर्शक, माता-पिता अपने स्वप्न जोड़ के देख रहे है। read more >>
हमें उनसे मुहोबत , उनके एक गुनाह की वजह से हुई थी । वो पसन्द करते थे। बस हमें .............ओर कुछ नहीं । read more >>
कलम ,को मजबूर कर दिया । आज, किसी के दो कड़वे लब्जो ने। जो, कलम, कभी नगमे लिखा करती थी। मुहोबत के वही कलम, आज कोई चिनगारी डुँढ़ रही है। क� read more >>
सवाल........,? पुछती. कमजोर निगाहे. आखिर ,क्यों ..... ? ज़िन्दगी को योही , ये दर्द देना था। क्या ,सूरज की तपन मे हमने पसीना नही बहाया। सघर्ष तो ,� read more >>
शब्द वो बेशक उनके थे। पर जमाने को , दर्द हमारा बाँट रहे थे। वजह थी । के ,मद्तों बाद, उन्हें आज , रहम आ रहा था । जो कयानात का लिखा, नही मि� read more >>
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