Raj Ashok 14 Jun 2023 कविताएँ देश-प्रेम सलामे वतन 37923 0 Hindi :: हिंदी
सरहदे ,बंदिश बनी है।
आज,तब - जब
निभानी थी। मुझे, एक रस्म ,
संसार की,
जो जोड़ देगी ,किसी दिल से
मुझे
अभी ,कुछ है ।
जिन्दा बची, ,ख्वाईशे मेरी
जो मेरे कदमों की थकान पे,
मुझे
कभी ,शर्मिन्दा नहीं होने देती ।
तलाश है ।
तो चलना है । ढूँढना ।
फिर ,उस से मिलना है।
हाँ, मे हुँ । बेशक
एक सरहद का सिपाही ,
अपनी, प्रेम कहानी के किस्से ।
खुद, बनाता। खूद ,सुनाता हुँ।
मुहोबत ,
जो मेरी मिट्टी ने मुझे सिखाई
उसी के दम से।
अपना फर्ज निभाता हुँ ।
देखके, मुझे , अपनी वर्दी ,मे
दीवानगी ,लोगों की
निगाहों से,बोलती है ।
मेरे संग - संग,
मेरे वतन , को भी ,दिल से सलाम
ठोकती है।
जय हिन्द ......जय हिन्द