Raj Ashok 07 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत दिलोंजान 29762 0 Hindi :: हिंदी
शब्द वो बेशक उनके थे। पर जमाने को , दर्द हमारा बाँट रहे थे। वजह थी । के ,मद्तों बाद, उन्हें आज , रहम आ रहा था । जो कयानात का लिखा, नही मिटा सके वो भला, क्या प्यार बरसाऐगे । हैरत हुई , ये देख कर के, दिलोजान से चाहने वाले भी गुलाम, हो जाते है। तकदीर के चाह कर भी वो सहारे नहीं बन पाते नशीब के । सोचता हुँ। फरियादों से,, अगर ये मुहोबत मुकमल होती । तो हर कोई फरियादी बन जाता । पर इन्सान का मन है। कुछ मिले ना मिले। बिना दुआओं ओर फरियादों के नहीं रह पाता...... है ?