मुसाफिर को नई राहों का मंज़र मिल गया है,
मेहनत का उसे आज समंदर मिल गया है।
कल तक जो था खुद इक अदना सा तालिब-ए-इल्म,
आज उसे उस्तादों का व� read more >>
ये जो चेहरे पे चमक है, ये सदा रहने की नहीं,
वक्त की लहर है साहब, ये रुकने की नहीं।
कांच के घर में रहकर पत्थर से मोहब्बत कैसी?
ये जो मिट्ट� read more >>
दुनिया को फतह करने का अरमान न पाल तू,
पहले अपने मन के अंधेरों को ढाल तू।
बाहर तो मिल जाएँगे लश्कर तुझे कई,
अंदर जो चल रही है, वो जंग संभ� read more >>
भीड़ की आवाजों में, अपना राग कहीं खो न देना,
दुनिया के तराजू में, खुद के ख्वाबों को मत तोलना।
कोई कहेगा पत्थर तुमको, कोई कहेगा कांच यहाँ,
� read more >>
आज अलार्म को मैंने, ज़ोर से डाँटा है,
सपनों की चादर को, थोड़ा और बाँटा है।
भाड़ में जाए दुनिया, और दुनिया की ये दौड़,
आज मैंने खुद को, 'Do Not Dist read more >>