Anilkumar Rathwa (Sameer) 17 Feb 2026 कविताएँ अन्य #Google#motivational poem# 8360 0 Hindi :: हिंदी
भीड़ की आवाजों में, अपना राग कहीं खो न देना, दुनिया के तराजू में, खुद के ख्वाबों को मत तोलना। कोई कहेगा पत्थर तुमको, कोई कहेगा कांच यहाँ, पर तुम क्या हो, यह बस तुम ही जानो ओ मेरे जां। बाहर की चमक-धमक तो बस एक छलावा है, अंदर का सुकून ही असली दिखावा है। सूरज को क्या फर्क पड़ता है, जुगनू की बातों से, तुम अपनी रोशनी चुनो, लड़कर काली रातों से। शीशे में जो दिखता है, वह सिर्फ एक चेहरा है, रूह का समंदर तो बहुत ही गहरा है। दुनिया का काम है कहना, उसे कहने दो, तुम अपनी कश्ती को, अपनी लहर में बहने दो।