Anilkumar Rathwa (Sameer) 17 Feb 2026 कविताएँ अन्य #Google # hindipoem# 6447 0 Hindi :: हिंदी
आज अलार्म को मैंने, ज़ोर से डाँटा है, सपनों की चादर को, थोड़ा और बाँटा है। भाड़ में जाए दुनिया, और दुनिया की ये दौड़, आज मैंने खुद को, 'Do Not Disturb' पे काटा है। नहाने का इरादा तो, सुबह से ही नेक है, पर बिस्तर से हटने का, चांस भी एक-नेक है। तौलिए को कुर्सी पर, वीरान रहने दो, आज खयालों के घोड़े, थोड़े हैरान रहने दो। चाय का कप है, और हाथों में अखबार, पर खबरें नहीं पढ़नी, बस देखनी है बहार। मोबाइल की रिंगटोन, अब दुश्मन सी लगती है, आज तो 'म्यूट' वाली, शांति ही सजती है। दोपहर के खाने में, बस 'मम्मी वाला स्वाद' हो, काम-काज की बातें, न रत्ती भर याद हों। एक झपकी ऐसी हो, जो शाम तक खींचे, जैसे दुनिया चल रही हो, बस हमारी पलकों के नीचे। जिंदगी ज़रा 'Slow Motion' में, आज चलनी चाहिए, ये जो भागदौड़ की बर्फ है, आज पिघलनी चाहिए।