Anilkumar Rathwa (Sameer) 18 Feb 2026 ग़ज़ल समाजिक #Google#Motivational#poem# 7808 0 Hindi :: हिंदी
दुनिया को फतह करने का अरमान न पाल तू, पहले अपने मन के अंधेरों को ढाल तू। बाहर तो मिल जाएँगे लश्कर तुझे कई, अंदर जो चल रही है, वो जंग संभाल तू। ये जो घमंड की ऊँची दीवारें हैं खड़ी, ईंट-दर-ईंट गिरा इन्हें, अब निकाल तू। खामोश रह के सुन कभी भीतर की सरसराहट, सवालों के शोर में न अपनी रूह को डाल तू। जो खुद के मन को जीत ले, वो है असली सिंकदर, मिट्टी के खिलौनों में न खुद को खंगाल तू।