Anilkumar Rathwa (Sameer) 20 Feb 2026 ग़ज़ल समाजिक #Google#Motivational#poetry# 8547 0 Hindi :: हिंदी
मिले हैं जख्म तो मरहम लगाना सीख लेंगे हम, हवाओं के रुख़ को खुद ही मोड़ना सीख लेंगे हम। अभी सूरज ढला है, रात की मुट्ठी में अंधेरा है, सहर होने की खातिर, फिर से जलना सीख लेंगे हम। बुरे हालात से कह दो कि अपनी जिद बदल डाले, कि गिर-गिर कर दोबारा, फिर संभलना सीख लेंगे हम। किताब-ए-जिंदगी के हर पन्ने पर जीत लिक्खी है, अगर हारे हैं तो, फिर जीतना भी सीख लेंगे हम। हमें मालूम है 'मंज़िल' खड़ी है राह तकती अब, थके पैरों से अपनी, राह चलना सीख लेंगे हम।