कविता ( गिला )
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!
फ़क़ीरी में, मैं हूँ पला !
फ़क़ीरी का भी हो भला !!
फ़क़ीरी से ही सीखा हूँ !
जीने की हर कला read more >>
तू इधर इधर के बात न कर
ये बता तेरा इरादा क्या हैं !
तू हर बार दोसी बताता हैं मुझे
लेकिन ये तो बता तेरा सच क्या हैं !!
शहर के शहर हैं जल रह� read more >>