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कविता = गिला

Vipin Bansal 15 Apr 2023 कविताएँ अन्य 34634 0 Hindi :: हिंदी

कविता ( गिला )

रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!
फ़क़ीरी में, मैं हूँ पला ! 
फ़क़ीरी का भी हो भला !!
फ़क़ीरी से ही सीखा हूँ !
जीने की हर कला !!
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!

ख़ाली हाथ मैं चला !
कहीं मिला कहीं छीना !!
किस बात का करूं गिला !
जो मिला यहीं मिला !!
हानि-लाभ क्या बला !
यह न मुझे पता चला !!
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!

हर मौसम की अपनी छटा !
पतझड़ से न उपवन घटा !!
उपवन का श्रृंगार हुआ !
पतझड़ तो बदनाम हुआ !!
कोई मौसम न ख़ला !
मौसम मुताबिक़ मैं ढ़ला !!
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!

सुख की जब चली हवा !
खुद को भी दिया भुला !!
दुख की जब छाई घटा !
रब से उसने दिया मिला !!
दुख से सुख पाने की !
आ गई मुझे कला !!
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!

विपिन बंसल

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