Rupesh Singh Lostom 14 Apr 2023 कविताएँ अन्य तू इधर इधर के बात न कर 31897 0 Hindi :: हिंदी
तू इधर इधर के बात न कर ये बता तेरा इरादा क्या हैं ! तू हर बार दोसी बताता हैं मुझे लेकिन ये तो बता तेरा सच क्या हैं !! शहर के शहर हैं जल रहा इसको बुझा सको ऐसा इंतज़ाम क्या हैं ! माउसी छाई हैं मनहूस बन के नगर में इस उदासी का उत्तरदाई कौन हैं !! इधर उधर की बात छोड़ और ये बताओ अभी बाकि क्या हैं ! वड़े मासूम हैं हुजूरे आला बस सियासत के लिए कुछ सिस ही तो काटे हैं धर्म मजहब जाती ही तो बाटे हैं कुछ आतंकी ही तो पाले हैं कुछ को बेबा तो कुछ घर ही तो उजाड़े हैं !!