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वेगवेगळी फिरतात भुंगे, फुलांवरती घालतात पिंगे, सायंकाळचे ऊन कोवळे किलबिल किलबिल करती रानपाखरे झुळझुळ वाहती झरे मा� read more >>
तमन्ना-ए-दिल में लिए !! पर्वत कहीं चोटी होगा - अरमानों से ऊंचा कोई शिखर , ना हीं दिल से गहरा कोई सागर जज्बा-ए-सफर में - जिंदगी से मंजिल तक read more >>
परम पुरुषार्थ! अनुभव युक्त- सत्य का निरूपण परम पुरुषार्थ! कुदरत ने- हृदय में प्रत्यक्ष रखा है तभी तो मानव तन- ईश्वर का साक्षात मंद� read more >>
आई जनामध्ये रडे, बाप घरामध्ये रडे आई म्हणे बाळा तू जेवलास का बाप म्हणे बाळा तू रुसलास का आई बाळाला श्रुगांर करी बाप बाळाला श्रुगां� read more >>
अंधेरे में सरकारी नौकरी की चाहत वाला जितने अंधेरे थे जहेन में सब गरीबी के बने बनाए थे चाहत थी सरकारी नौकरी की सभी read more >>
अजब सी कविता का एक हिस्सा हू ना जीवन में रोज का एक किस्सा हूं ना पढूं किताब कौन सी जो ये सीख मिले कितना पन्ना पलटू मैं, कितनी ला� read more >>
हम जिंदगी नही साहब, बस जी रहे है गांव में मिलता था पानी शुद्ध पीने को, सहर में फिल्टर वाला पी रहे है कभी जब जी ऊबता था दोस्तो से म read more >>
हा हा ये शाप हि तो है अगर किसीको हो जाता है तो, वो उस शाप से कभी निकलता नहीं हैं, हमारी मुंगफली कि खेती थी वहाँ पानी देने के लिए मेरे � read more >>
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बदलते ऋतू चक्र हे कधी पाऊस कधी गारवा चहूकडे कधी ऊनाची झळ तेज पडे बेभान ऋतू चक्र मनाला न कळे... आज ऋतू चां हा एकत्रितपणा बेधुंद गारवा क� read more >>
किसने देखा ताप में उर फिर सुगन्धित हो गया सुर । नवल निश्चल नयन अचम्भित भागते गिरते नहीं फिर । दिग दिशाएं झूमती सी कहां गई निर्मल हथेल read more >>
अच्छा है दिखता नहीं, आने वाला काल। गरमी से बदहाल है, सभी जीव की चाल।। सभी जीव की चाल,दिखे सुन्दर दुनिया में। करिए सभ्य विचार,और रहिए बढ� read more >>
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