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ऋतू चक्र

ज्योती महादुले 24 Apr 2023 कविताएँ अन्य 96969 1 5 Hindi :: हिंदी

बदलते ऋतू चक्र हे
कधी पाऊस कधी गारवा चहूकडे
कधी ऊनाची झळ तेज पडे
बेभान ऋतू चक्र मनाला न कळे...

आज ऋतू चां हा एकत्रितपणा
बेधुंद गारवा कधी सोसाट्याचा वारा
कधी ऊनाच्या चटकदार झळा
कधी पावसाचा भरघोस मारा
गारा झेलून रान कसे झाले
बदलते ऋतू चक्र हे.....

आज बळीराजा होळपळून ऋतूमध्ये निघे
हे ऋतूंचे बदलते रुप बघून काळजीत पडे 
एका वर्षात ऋतू तिन म्हणताना
हे ऋतूंचे मिश्रण झेलताना
काळीज त्याचे हुरहुर करे
बदलते ऋतू चक्र हे........

Comments & Reviews

Ujjwal Kumar
Ujjwal Kumar Good

3 years ago

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