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इबादतों की दुनियाँ मे खोया हो जैसे वो सोया था ऐसे फरिश्ता सोया हो जैसे उसके पत्तों से शबनम ऐसे झड़ती थी रात भर वो दरख़्त अकेले रोया � read more >>
और कितना बवंडर करके छोड़ेगा वक़्त क्या सब खंण्डहर करके छोड़ेगा हाकिम खुश है अपने फैसलों पर लगता है सब बंजर करके छोड़ेगा ये क्या कम � read more >>
आदतों से सुधरा तो सुधरता गया वो फिर जो उभरा तो उभरता गया वो इतनी सच्ची थी रूह उसकी कि जब जिस्म मे उतरा तो उतरता गया वो दामन से एक धागा � read more >>
सच्चाई की कलम,हक की रौशनाई बनेगा है कोई जो दावत देगा,खुदा का दाई बनेगा इबादत करने वाले लोग फिरदौस मे जाऐंगे बेनमाजी मौत के बाद कब्र क� read more >>
खुश्क लबों की प्यास ही रहूंगा आस हूँ मै और आस ही रहूंगा मुझे कोई दुख नही है यार मगर आदतन मायूस उदास ही रहूंगा जमाना चाहें तेरे लियें � read more >>
कलम मेरी हो गई दिवानी कलम से मेरी आशिकी पुरानी दिले दर्दे गम को पीती हो जैसे जख्मों को शब्दों से सिती है ऐसे दिले मर्ज की दवा है निराल� read more >>
आईनों पर दाग की सिफारिश ना कर तू बेवजह आग की सिफारिश ना कर मैं तुझे जन्नत बसाकर दे सकता हूँ पर उजड़े हुए बाग की सिफारिश ना कर पहले ही � read more >>
जिस्म थे नुमाइश थी दिखावट थी सब ओर असल चीज गायब थी बनावट थी सब और खानदान ही खानदान के खून का प्यासा था रोजी रोटी के झगड़े थे अदावत थी स� read more >>
इंसानों के खूंखार चेहरों से डरते हैं अब जमीन पे फरिश्ते भी कम उतरते हैं अब उखड़ी सड़कों पर कभी निकलकर देखो कुत्ते बिल्ली की तरह लोग म read more >>
रूह कब्ज करो,हथेली पे जान को उतारो रू ए जमीं पर कभी आसमान को उतारो हम अर्जी देकर थक चुके हैं अब तो कभी नक्शे कागज पर हमारे मकान को उतार� read more >>
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ ! नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !! मोहब्बतें तुम्हारी, धड़कने बन गई हैं ! मरहूम ए दिल को, धड़ read more >>
जल, कल | तज, छल | पथ, फल | रण, हल | शक, मल | उठ, चल | सच, बल | लत, खल | धन, पल | read more >>
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